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Viral Letter: बॉर्डर पर जाना चाहता है बिहार का यह शिक्षक, ACS सिद्धार्थ से मांगी इजाजत

Viral Letter: कैमूर के शिक्षक वैभव किशोर ने ACS एस. सिद्धार्थ को पत्र लिखकर भारत-पाक सीमा पर सैन्य अभियान में योगदान की अनुमति मांगी। पत्र सोशल मीडिया पर वायरल।

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बॉर्डर पर जाना चाहता है बिहार का यह शिक्षक
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Deepak Kumar
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Viral Letter: बिहार के कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड में चफना के उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक वैभव किशोर ने देशभक्ति की अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने 8 मई 2025 को बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ को एक पत्र लिखकर भारत-पाकिस्तान सीमा पर सैन्य अभियान में सहयोग करने की अनुमति मांगी। यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और लोग उनकी देशभक्ति की भावना को सलाम कर रहे हैं।


यह अनुरोध ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक तनाव के बीच आया, जिसमें भारत ने 7 मई को नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। वैभव किशोर ने अपने पत्र में लिखा कि मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों में भारत-पाक सीमा पर युद्ध की आशंका बढ़ गई है। एक जिम्मेदार नागरिक और प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में, वह मातृभूमि की रक्षा में प्रत्यक्ष योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने अपनी योग्यताओं का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पास NCC का ‘C’ सर्टिफिकेट, दो वर्षीय रोवर/रेंजर प्रशिक्षण, और राष्ट्रीय सेवा योजना का अनुभव है। ये सभी उन्हें राष्ट्रीय आपात स्थिति में सहयोग के लिए सक्षम बनाते हैं। X पर एक पोस्ट में कहा गया, “NCC और NSS प्रशिक्षित शिक्षक वैभव किशोर तैयार हैं देश के लिए, गर्व है!”


Viral Letter: बॉर्डर पर जाना चाहता है बिहार का यह शिक्षक, ACS सिद्धार्थ से मांगी इजाजत


पत्र में वैभव ने भावुक अपील की, “मुझे गर्व होगा अगर मैं मातृभूमि की रक्षा में योगदान दे सकूं। यह मेरे जीवन का सबसे गौरवपूर्ण अवसर होगा।” उनका यह पत्र स्थानीय समुदाय और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है। हालांकि, शिक्षा विभाग या ACS एस. सिद्धार्थ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वैभव का यह कदम उस समय सामने आया है, जब ACS सिद्धार्थ शिक्षकों के सम्मान और कार्यप्रणाली को बेहतर करने के लिए सक्रिय हैं, जैसा कि उनके हाल के आदेशों में देखा गया। यह पत्र न केवल वैभव किशोर की देशभक्ति को दर्शाता है, बल्कि उन हजारों भारतीयों की भावना को भी उजागर करता है, जो राष्ट्रीय संकट में देश के साथ खड़े हैं।