पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर छिड़ी बहस ने नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा द्वारा नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की इच्छा जताए जाने के बाद जेडीयू ने तीखा पलटवार किया है। जेडीयू की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए हमले में उपेंद्र कुशवाहा को सीधे निशाने पर लेते हुए उनके राजनीतिक कुनबे को ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया।
जेडीयू नेता उमेश सिंह कुशवाहा ने बिना नाम लिए ऐसा तंज कसा, जिसने बिहार की सियासत में बयानबाजी को और गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को जेडीयू की चिंता छोड़कर पहले अपने कुनबे की चिंता करनी चाहिए, क्योंकि उनका कुनबा “पंचर वाहन की तरह समय-समय पर अपना संतुलन खोता रहता है।”
‘चादर जितनी हो, पांव उतने ही फैलाने चाहिए’
जेडीयू की ओर से किए गए तीखे राजनीतिक हमले में कहा गया कि गांवों में बड़े-बुजुर्ग हमेशा सलाह देते हैं कि “चादर जितनी हो, पांव उतने ही फैलाने चाहिए।” लेकिन कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव पकाने और कभी पूरे न होने वाले दिवास्वप्न देखने की होती है।
जेडीयू ने कहा कि ऐसे लोगों को जेडीयू की चिंता करने के बजाय पहले अपने राजनीतिक परिवार की चिंता करनी चाहिए। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि जिनका अपना कुनबा ही समय-समय पर संतुलन खोता रहता है, उन्हें दूसरे दलों की विरासत और भविष्य की चिंता करने से पहले अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करनी चाहिए।
यहीं नहीं, जेडीयू ने उपेंद्र कुशवाहा के बयान के पीछे राजनीतिक बेचैनी की वजह भी बताई। पार्टी का कहना है कि बिहार के भविष्य के रूप में निशांत की बढ़ती लोकप्रियता और जनस्वीकार्यता कुछ राजनीतिक लोगों को हजम नहीं हो रही है। जेडीयू की ओर से कटाक्ष किया गया कि ऐसे नेताओं को अपना “राजनीतिक पाचनतंत्र” मजबूत कर लेना चाहिए, क्योंकि भविष्य में इसकी जरूरत पड़ सकती है।
राजगीर में कुशवाहा ने छेड़ी थी विरासत की बहस
दरअसल, इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के उस बयान से हुई, जो उन्होंने राजगीर में आयोजित पार्टी के विमर्श शिविर के दौरान दिया था। कुशवाहा ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा था कि उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी को लेकर अब एक बड़ा सवाल खड़ा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की और अब उन्होंने खुद सक्रिय राजनीति से विश्राम लेने का निर्णय लिया है। ऐसे में बिहार की राजनीति में एक बड़े वर्ग के सामने यह सवाल है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे कौन बढ़ाएगा।
कुशवाहा ने कहा कि इस विरासत पर दावा करने वाले कई लोग सामने आ सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय लोक मोर्चा का मानना है कि बिहार की जनता के एक बड़े वर्ग की अपेक्षा है कि यह जिम्मेदारी आरएलएम को मिलनी चाहिए। यानी उपेंद्र कुशवाहा ने सीधे तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी पार्टी खुद को नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत का एक दावेदार मानती है। यही बयान अब जेडीयू नेताओं के निशाने पर आ गया है।
जेडीयू ने निशांत के नाम से बदला राजनीतिक नैरेटिव
जेडीयू के ताजा पलटवार की सबसे खास बात यह रही कि पार्टी ने उपेंद्र कुशवाहा के दावे का जवाब केवल राजनीतिक हमला करके नहीं दिया, बल्कि निशांत की बढ़ती चर्चा को भी केंद्र में ला दिया। जेडीयू की ओर से कहा गया कि बिहार के भविष्य और लोकप्रिय नेता के रूप में निशांत की बढ़ती जनस्वीकार्यता कुछ लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि नीतीश कुमार की विरासत को लेकर भविष्य में जेडीयू का नैरेटिव किस दिशा में आगे बढ़ेगा। एक तरफ उपेंद्र कुशवाहा आरएलएम को इस विरासत का स्वाभाविक दावेदार बताने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं जेडीयू यह साफ संकेत दे रही है कि पार्टी के भविष्य और नेतृत्व को लेकर बाहर के नेताओं के दावे को वह स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
‘पहले अपना कुनबा संभालें, फिर जेडीयू की चिंता करें’
जेडीयू के इस बयान का सबसे तीखा हिस्सा वही है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा के राजनीतिक संगठन और उनके कुनबे पर सवाल उठाया गया है। “पंचर वाहन की तरह बार-बार संतुलन खोने” वाली टिप्पणी के जरिए जेडीयू ने साफ तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की है कि आरएलएम को जेडीयू की राजनीतिक विरासत पर दावा करने से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति का आकलन करना चाहिए।
बिहार की राजनीति में यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। उपेंद्र कुशवाहा ने जिस तरह नीतीश कुमार की विरासत को लेकर अपनी पार्टी की दावेदारी पेश की है, उससे जेडीयू नेताओं का आक्रामक होना तय माना जा रहा है। वहीं निशांत की बढ़ती चर्चा को लेकर जेडीयू के बयान ने इस बहस में एक नया एंगल जोड़ दिया है।
फिलहाल, इतना तय है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर शुरू हुई यह बहस अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहने वाली। उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी, जेडीयू का ‘पंचर गाड़ी’ वाला तंज और निशांत की बढ़ती चर्चा ने बिहार की राजनीति में नई सियासी पटकथा लिखनी शुरू कर दी है। अब देखना यह होगा कि इस जुबानी जंग का अगला जवाब आरएलएम की तरफ से कितना तीखा आता है।





