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बिहार में Student Credit Card लेने वालों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने कॉलेजों पर कसा शिकंजा, अब होगी जमीनी जांच

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़े निजी कॉलेजों और संस्थानों की सरकार जांच कराएगी। 1 सितंबर से 30 नवंबर तक दस्तावेज अपलोड होंगे, 30 दिसंबर तक होगी स्थलीय जांच।

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Tejpratap
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Bihar News : बिहार में छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक मदद देने वाली स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़े शिक्षण संस्थानों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने योजना के तहत सूचीबद्ध संस्थानों की वास्तविक स्थिति जांचने का फैसला किया है। इसके लिए निजी शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की भौतिक जांच कराई जाएगी।


शिक्षा विभाग ने इस संबंध में संबंधित संस्थानों को निर्धारित पोर्टल पर जरूरी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। संस्थानों को 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक अपने अभिलेख पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इसके बाद उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर संस्थानों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


क्यों लिया गया जांच का फैसला?

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए ऋण की सुविधा दी जाती है। योजना से जुड़े संस्थानों में पढ़ाई, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक माहौल की स्थिति ठीक है या नहीं, इसका सत्यापन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों को वास्तव में निर्धारित मानकों वाले संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।


शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित संस्थानों की जांच कराने का निर्देश दिया है। खास तौर पर निजी संस्थानों में उपलब्ध जमीन, भवन, आधारभूत संरचना और शैक्षणिक वातावरण की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा।


जिला स्तर पर बनेगी जांच समिति

संस्थानों की जांच के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इस समिति की अध्यक्षता जिला शिक्षा पदाधिकारी करेंगे। जरूरत के अनुसार भूमि और भवन से जुड़ी जानकारी रखने वाले संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी समिति में शामिल किया जा सकेगा।


संस्थानों की ओर से पोर्टल पर जमा किए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड का मिलान मौके पर उपलब्ध सुविधाओं से किया जाएगा। यानी केवल कागजों के आधार पर ही संस्थान को योग्य नहीं माना जाएगा, बल्कि उसकी वास्तविक स्थिति भी देखी जाएगी।


मान्यता और रैंकिंग पर भी नजर

सरकार ने संबंधित संस्थानों से गुणवत्ता से जुड़े मानकों को पूरा करने की दिशा में आवश्यक पहल करने को कहा है। इनमें NAAC से न्यूनतम ग्रेड C, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF की वार्षिक रैंकिंग में स्थान अथवा राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड से मान्य पाठ्यक्रम संचालित करने जैसे मानक शामिल हैं।


इस पूरी प्रक्रिया के तहत संबंधित संस्थानों को समय सीमा के भीतर अपनी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद जिला स्तरीय समितियां स्थलीय जांच करेंगी।


30 दिसंबर तक पूरी करनी होगी जांच

शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में संबंधित संस्थानों की स्थलीय जांच की प्रक्रिया 30 दिसंबर 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। इससे साफ है कि सरकार इस बार योजना से जुड़े संस्थानों की पात्रता और व्यवस्थाओं को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।


इस जांच का असर उन निजी कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ सकता है जो स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत विद्यार्थियों को दाखिला देते हैं। छात्रों के लिए भी यह जांच महत्वपूर्ण है, क्योंकि योजना के माध्यम से शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों के हित सीधे तौर पर संस्थान की मान्यता, सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े हैं।


1248 अभ्यर्थी अंकेक्षक सेवा की मुख्य परीक्षा के लिए चयनित

इधर, बिहार लोक सेवा आयोग ने पंचायती राज विभाग के अंतर्गत अंकेक्षक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया है। परीक्षा में कुल 1248 अभ्यर्थियों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए किया गया है।


सामान्य वर्ग का कटऑफ 92 अंक रहा। अनारक्षित श्रेणी से 702, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से 138, अनुसूचित जाति से 148, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 105, पिछड़ा वर्ग से 105 और पिछड़ा वर्ग की महिला श्रेणी से 39 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। क्षैतिज आरक्षण के तहत दिव्यांग श्रेणी के 35 और स्वतंत्रता सेनानी के वंशज श्रेणी के 20 अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ है।


इस तरह बिहार में एक ओर स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़े संस्थानों की गुणवत्ता और व्यवस्था की जांच शुरू होने जा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया में भी परिणाम जारी होने का सिलसिला जारी है।