ब्रेकिंग
जेसीबी से खोदे गड्ढे में डूबने से तीन नाबालिग की मौत, नहाने के दौरान हादसा; गांव में पसरा मातमभोजपुर में बिगड़े हालात! गंगा खतरे के निशान से ऊपर, जलस्तर बढ़ने से कई गांवों पर मंडराया बाढ़ का संकट; तीन स्कूलों में पढ़ाई बंदपापी पिता की शर्मनाक करतूत: नाबालिग बेटी से कई बार जबरन बनाए शारीरिक संबंध, विरोध करने पर करता था मारपीटबिहार में NIA की बड़ी कार्रवाई: मुख्य पार्षद के घर छापेमारी से हड़कंप, करमुल्लाह अंसारी को साथ ले गई जांच एजेंसीBihar News : जेल में 19 साल के रोशन की मौत पर बवाल, तेजस्वी यादव ने NHRC से कहा- सच सामने लाने के लिए हो स्वतंत्र जांचजेसीबी से खोदे गड्ढे में डूबने से तीन नाबालिग की मौत, नहाने के दौरान हादसा; गांव में पसरा मातमभोजपुर में बिगड़े हालात! गंगा खतरे के निशान से ऊपर, जलस्तर बढ़ने से कई गांवों पर मंडराया बाढ़ का संकट; तीन स्कूलों में पढ़ाई बंदपापी पिता की शर्मनाक करतूत: नाबालिग बेटी से कई बार जबरन बनाए शारीरिक संबंध, विरोध करने पर करता था मारपीटबिहार में NIA की बड़ी कार्रवाई: मुख्य पार्षद के घर छापेमारी से हड़कंप, करमुल्लाह अंसारी को साथ ले गई जांच एजेंसीBihar News : जेल में 19 साल के रोशन की मौत पर बवाल, तेजस्वी यादव ने NHRC से कहा- सच सामने लाने के लिए हो स्वतंत्र जांच

सिर्फ PhD और NET काफी नहीं! बिहार में अब यूनिवर्सिटी शिक्षकों को हर साल देनी होगी 36 घंटे की ‘अकादमिक परीक्षा’ जैसी ट्रेनिंग

बिहार के विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षकों के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। अब शिक्षकों को हर साल 36 घंटे की अकादमिक ट्रेनिंग लेनी होगी। नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए भी फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम अनिवार्य किया गया है।

सिर्फ PhD और NET काफी नहीं! बिहार में अब यूनिवर्सिटी शिक्षकों को हर साल देनी होगी 36 घंटे की ‘अकादमिक परीक्षा’ जैसी ट्रेनिंग
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Bihar Teacher Training :  बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अब सिर्फ विषय का विशेषज्ञ होना ही पर्याप्त नहीं होगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों के अकादमिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। राज्यपाल सचिवालय की पहल के तहत विश्वविद्यालयों, अंगीभूत महाविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए हर साल छह दिवसीय यानी 36 घंटे का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) आयोजित किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, शोध पद्धतियों और बदलती शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप तैयार करना है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था केवल पहले से कार्यरत शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगी। नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों के लिए भी फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम अनिवार्य किया गया है।

पीएचडी और नेट के साथ अब ट्रेनिंग भी जरूरी

अब किसी शिक्षक के पास पीएचडी की डिग्री हो, यूजीसी-नेट या जेआरएफ की योग्यता हो और शोध पत्र प्रकाशित किए हों, इसके बावजूद अकादमिक प्रशिक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को नियुक्ति के बाद निर्धारित अवधि के भीतर प्रशिक्षण पूरा करना होगा।

नई व्यवस्था के तहत उन्हें कक्षा में बेहतर तरीके से पढ़ाने, विद्यार्थियों की क्षमता पहचानने और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यानी अब विश्वविद्यालयों में शिक्षक की भूमिका केवल विषय पढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों के समग्र विकास में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

हर साल छह दिन का विशेष प्रशिक्षण

राज्यपाल सचिवालय की विशेष कार्य योजना के अनुसार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रत्येक वर्ष छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करने का प्रावधान किया गया है। इस दौरान कुल 36 घंटे का अकादमिक प्रशिक्षण होगा।प्रशिक्षण ऑनलाइन, ऑफलाइन या हाइब्रिड माध्यम से आयोजित किया जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल होने वाले शिक्षकों की उपस्थिति को ड्यूटी लीव के रूप में मान्यता देने का भी प्रावधान है।

किन विषयों पर होगी शिक्षकों की ट्रेनिंग?

फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में पारंपरिक शिक्षण के साथ आधुनिक और उपयोगी विषयों को भी शामिल किया जाएगा। शिक्षकों को पाठ्यक्रम विकास, बहुविषयक शिक्षा और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धति से परिचित कराया जाएगा। इसके अलावा प्रशिक्षण में अकादमिक नेतृत्व, शोध पद्धति, भारतीय ज्ञान प्रणाली, आईसीटी टूल्स और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी जानकारी दी जाएगी। इसका मकसद शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक माहौल के लिए तैयार करना है।

नवनियुक्त शिक्षकों के लिए इंडक्शन प्रोग्राम

नई व्यवस्था में नवनियुक्त शिक्षकों के लिए फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम को खास महत्व दिया गया है। ऐसे शिक्षकों को नियुक्ति के एक वर्ष के भीतर यह प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके साथ ही रिफ्रेशर कोर्स, शॉर्ट टर्म प्रोग्राम और अन्य फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम भी प्रशिक्षण व्यवस्था का हिस्सा होंगे। इससे शिक्षकों को समय-समय पर अपने ज्ञान और शिक्षण कौशल को अपडेट करने का अवसर मिलेगा।

सर्टिफिकेट का करियर में भी मिलेगा फायदा

फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में भाग लेने वाले शिक्षकों को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। यह प्रमाण पत्र करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) और API स्कोर के लिए मान्य होगा। यानी प्रशिक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों के अकादमिक करियर में भी इसकी उपयोगिता होगी।कार्य योजना में बेहतर शोध निधि और बुनियादी ढांचे की उपलब्धता बढ़ाने के साथ शिक्षकों के अकादमिक योगदान को अधिक मान्यता देने पर भी जोर दिया गया है। इससे शोधकर्ताओं और शिक्षकों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर जोर

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के अनुसार, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। ऐसे समय में शिक्षकों को गहन अकादमिक ज्ञान, शोध क्षमता और आधुनिक तकनीकों से लैस करना जरूरी है।

फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिए शिक्षकों को सतत व्यावसायिक विकास के अवसर मिलेंगे और उन्हें आजीवन सीखने वाला पेशेवर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ने की उम्मीद है।

राज्यपाल सचिवालय के स्तर से इस संबंध में विशेष कार्य योजना जल्द ही विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अपने स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह व्यवस्था बिहार की उच्च शिक्षा में शिक्षण, शोध और अकादमिक गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।