JAMUI: बिहार के जमुई जिले में पिछले दिनों सिस्टम की गंभीर लापरवाही का एक दर्दनाक मामला सामने आया था। जहां इलाज के लिए पटना ले जा रही एंबुलेंस का बीच रास्ते में तेल खत्म हो गया। घंटों तक एंबुलेंस सड़क किनारे खड़ी रहने के दौरान मरीज तड़पता रहा और इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई थी। मामला जमुई सदर अस्पताल से जुड़ा हुआ था और एम्बुलेंस में मरीज की मौत सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग पर मतासी के पास हुई थी।
इस खबर को फर्स्ट बिहार ने प्रमुखता से चलाया जिसके बाद इस खबर बड़ा असर अब हुआ है। दरअसल इलाज के लिए जमुई से पटना लाए जा रहे एक मरीज की बीच रास्ते में ही एम्बुलेंस का तेल खत्म हो जाने से हुई मौत के मामले को स्वास्थ्य विभाग ने काफी गंभीरता से लिया है। जमुई के सिविल सर्जन-सह-जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव ने एम्बुलेंस सेवा प्रदाता एलेंसी जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड के कलस्टर लीडर से इस मामले में तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। साथ ही एजेंसी के कलस्टर लीडर से पूछा गया है कि इस अति गंभीर लापरवाही के लिए क्यों नहीं आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि कई समाचार पत्रों के माध्यम से शुक्रवार को यह खबर प्रकाशित की गई है कि इलाज के लिए जमुई से पटना लाए जा रहे एक मरीज की बीच रास्ते में ही एम्बुलेंस का तेल खत्म हो जाने से मौत हो गई। मरीज के परिजनों ने बताया कि 75 वर्षीय धीरज रविदास की तबीयत दो दिन पहले अचानक खराब हो गई थी। पहले झाझा में उनका प्राथमिक उपचार किया गया और बाद उन्हें जमुई सदर अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना रेफर कर दिया। रास्ते में सिकंदरा के समीप एंबुलेंस का तेल खत्म हो गया और एम्बुलेंस बीच सड़क पर खड़ी हो गई। मृतक के परिजनों के अनुसार एम्बुलेंस के चालक ने तेल लाने में काफी देर कर दी और इस बीच भीषण गर्मी में मरीज की मौत हो गई।
जब एम्बुलेंस में मरीज की मौत हुई थी, तब परिजनों ने बताया था कि धीरज रविदास की तबीयत दो दिन पहले बिगड़ी थी। जिसकेपहले झाझा में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जमुई सदर अस्पताल लाया गया, जहां सीटी स्कैन में सिर में ब्लड जमने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना रेफर कर दिया था। दोपहर करीब 1:11 बजे एंबुलेंस पटना के लिए रवाना हुई थी। रास्ते में सिकंदरा में चालक ने ₹100 का डीजल भरवाया, लेकिन मतासी के पास पहुंचते ही लगभग 1:40 बजे एंबुलेंस का तेल खत्म हो गया और वाहन बीच सड़क पर खड़ा रह गया।
अजीत रविदास ने बताया था कि चालक ने तेल लाने में देरी की बात कही, लेकिन इस दौरान भीषण गर्मी में मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब 3:31 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान न तो कोई वैकल्पिक एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और न ही समय पर मदद मिली। बाद में दूसरी एंबुलेंस की मदद से शव को सदर अस्पताल लाया गया। वहीं, जेन प्लस कंपनी के एसीओ (जिला क्लस्टर लीडर) नीतीश कुमार ने बताया था कि चालक के पास भारत पेट्रोलियम का कार्ड था, लेकिन संबंधित पंप पर तेल उपलब्ध नहीं होने के कारण ईंधन नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि कार्ड आधारित व्यवस्था में उसी कंपनी के पंप से तेल लेना होता है।
जमुई से धीरज कुमार सिंह की रिपोर्ट





