DESK: इस साल हरितालिका तीज व्रत 14 सितंबर को मनाया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर पड़ने वाले इस पर्व में सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से निर्जला उपवास रखेंगी। ठीक इस पर्व के अगले दिन गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है।
14 सितंबर को रखा जाएगा तीज व्रत
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:15 बजे से 14 सितंबर की सुबह 7:29 बजे तक रहेगी। उदयकाल व्यापिनी तिथि के शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।
बताया जाता है कि हरितालिका तीज की परंपरा माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठिन तप किया था। उनकी सखियों द्वारा उन्हें एक गुप्त स्थान पर ले जाने के प्रसंग से ही ‘हरितालिका’ नाम की व्युत्पत्ति मानी जाती है। माता पार्वती ने भगवान शिव की बालुकामयी प्रतिमा बनाकर पूजा की थी। इसी परंपरा के तहत पार्थिव प्रतिमा बनाकर गंगाजल, अक्षत, चंदन, बेलपत्र, ऋतुफल और पकवान से पूजा करना शुभ एवं कल्याणकारी माना जाता है।
व्रती महिलाएं 14 सितंबर को पूरे दिन निर्जला उपवास रखेंगी। प्रदोषकाल में मिट्टी से निर्मित उमा-महेश्वर और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान तीज व्रत कथा का श्रवण, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण भी होगा। 15 सितंबर की सुबह व्रत का पारण किया जाएगा।
15 सितंबर से शुरू होगा गणेश उत्सव
हरितालिका तीज के अगले दिन यानी 15 सितंबर, मंगलवार से गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का प्रकटोत्सव मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन विशाखा नक्षत्र और ऐन्द्र योग रहेगा। गणेश उत्सव 15 सितंबर से 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा का पूजन शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश बुद्धि, शुभता और सिद्धि के प्रदाता हैं। गणपति की आराधना से जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। गणेश स्थापना गणेश उत्सव के पहले दिन की जाती है, उसकी तरह अनंत चतुर्दशी पर बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है. गणेश विसर्जन स्थापना के डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन और अनंत चतुदर्शी पर किया जाता है.





