गोपालगंज: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन गोपालगंज से सामने आया एक मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि थावे प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मुकेरी टोला में कार्यरत रही एक शिक्षिका करीब 67 दिनों तक सऊदी अरब में थीं, लेकिन इस दौरान स्कूल और डीएलएड प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दर्ज होती रही।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसकी दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। विभाग ने संबंधित अधिकारियों से सभी उपलब्ध साक्ष्यों के साथ विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई केवल शिक्षिका तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि हाजिरी दर्ज करने और उसे प्रमाणित करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
आरोपों के केंद्र में शिक्षिका सना रेयाज हैं, जो वर्तमान में सदर प्रखंड के एक उर्दू प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत बताई जा रही हैं। उनके खिलाफ पहले भी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। शिकायत अधिकारियों तक पहुंचने के बाद दस्तावेजों की जांच शुरू की गई, जिसमें पासपोर्ट और ई-टिकट से जुड़ी जानकारी को अहम माना गया है।
67 दिन सऊदी अरब में रहने का रिकॉर्ड
जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार शिक्षिका 21 जनवरी 2017 को नई दिल्ली से सऊदी अरब गई थीं और 30 मार्च 2017 को भारत वापस लौटीं। इस तरह वह करीब 67 दिनों तक विदेश में रहीं। शिक्षिका का कहना है कि वह गंभीर स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए सऊदी अरब गई थीं।
लेकिन विवाद इस बात को लेकर है कि इसी अवधि के दौरान स्कूल के उपस्थिति रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी दर्ज होने के आरोप हैं। सवाल यह है कि यदि शिक्षिका विदेश में थीं तो बिहार के सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में उनकी मौजूदगी आखिर किस आधार पर दिखाई गई?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिस समय शिक्षिका विदेश में थीं, वह डीएलएड सत्र 2016-18 की प्रशिक्षणार्थी भी थीं। डीएलएड प्रशिक्षण के लिए न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होती है। ऐसे में प्रशिक्षण केंद्र के रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दर्ज होने को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशिक्षण केंद्र की पंजिका गायब, जांच और उलझी
जांच के दौरान डायट थावे प्रशिक्षण केंद्र की उपस्थिति पंजिका के गायब होने की बात भी सामने आई है। इससे पूरे मामले की जांच और जटिल हो गई है। अब विभाग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किए गए और उन्हें किसने प्रमाणित किया। जांच अधिकारी पासपोर्ट, वीजा, ई-टिकट, विद्यालय की उपस्थिति पंजिका, डीएलएड प्रशिक्षण रिकॉर्ड और अवकाश से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेंगे। शिक्षिका के लिखित जवाब को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
बेटे के जन्म की तारीख और स्कूल हाजिरी पर भी सवाल
मामले में एक और बिंदु जांच अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार शिक्षिका के पुत्र का जन्म 2 नवंबर 2017 को हुआ था। आरोप है कि पूर्व जांच के दौरान नवंबर महीने की विद्यालय उपस्थिति पंजिका में भी शिक्षिका की उपस्थिति दर्ज मिली थी। अब विभाग इस रिकॉर्ड की भी दोबारा जांच करेगा। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि संबंधित अवधि में उपस्थिति वास्तविक थी या रिकॉर्ड में किसी तरह की अनियमितता हुई।
सबसे बड़ा सवाल- हाजिरी किसने लगाई?
पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विदेश में रहने के दौरान शिक्षिका की उपस्थिति दर्ज होना सही पाया जाता है, तो आखिर हाजिरी किसने लगाई और उसे प्रमाणित किसने किया? शिक्षा विभाग अब यह भी जांच करेगा कि मामले में केवल शिक्षिका की भूमिका थी या विद्यालय और प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भी इसमें कोई भूमिका रही। रिकॉर्ड में गड़बड़ी साबित होने पर जांच का दायरा व्यापक हो सकता है।
विभाग ने दोबारा जांच के दिए आदेश
स्थापना डीपीओ विनय कुमार सुमन ने सदर प्रखंड के बीईओ नीरज कुमार को मामले के सभी बिंदुओं की जांच कर साक्ष्य के साथ रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। बीईओ के अनुसार संबंधित शिक्षिका को बीआरसी बुलाकर मामले की जानकारी ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
फिलहाल विभागीय जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि सऊदी अरब में रहने के दौरान बिहार के स्कूल और डीएलएड प्रशिक्षण रिकॉर्ड में शिक्षिका की उपस्थिति वास्तव में कैसे दर्ज हुई। लेकिन इस मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जब शिक्षिका हजारों किलोमीटर दूर सऊदी अरब में थीं, तब सरकारी रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी आखिर किसने और कैसे दर्ज कर दी?





