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माले ने तेजस्वी को CM उम्मीदवार घोषित किया, 45 सीटों पर लड़ने की तैयारी, कांग्रेस को कराया सच का सामना

दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस भले ही राष्ट्रीय पार्टी हो, लेकिन बिहार में उसकी जमीनी उपस्थिति बेहद कमजोर है। माले की पहचान एक मजबूत जमीनी संगठन के रूप में रही है और यह बात सबको पता है।

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बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी
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Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

BIHAR: करीब 4 महीने बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसकी तैयारी में तमाम पार्टियां लगी हुई है। एनडीए के साथ-साथ महागठबंधन भी चुनाव की तैयारी में लगा है। पिछली बार माले को 19 सीटें मिली थी जिसमें 12 पर जीत हासिल की थी। जबकि कांग्रेस को 70 सीटें दी गयी थी जिसमें मात्र 19 पर ही जीत हासिल की। लेकिन इस बार माले 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।


एक निजी चैनेल से बातचीत करते हुए सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने खुद इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब महागठबंधन की सरकार बनेगी तब तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। अपने सहयोगी दल कांग्रेस पर तंज कसते हुए सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में यदि माले को 19 की जगह ज्यादा सीटें मिलती, तो आज महागठबंधन सत्ता में होता। 


जबकि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 70 सीटें दी गयी थी लेकिन जीत मात्र 19 सीटें पर ही कांग्रेस ने हासिल की। वही उस वक्त माले को 19 सीटें मिली थी जिसमें 12 सीट पर जीत दर्ज की गई थी। वही 2024 के लोकसभा चुनाव में माले को 3 सीट दी गयी थी जिसमें 2 सीट पर माले ने जीत दर्ज कराई थी। माले जमीनी स्तर की पार्टी है और जमीनी स्तर पर माले की ताकत का महागठबंधन के सहयोगी दलों को भी फायदा मिला है। 


जिस इलाके में माले की स्थिति मजबूत है वहां आरजेडी और कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन रहा था। दीपांकर ने उम्मीद जताई है कि इस बार सीपीआई माले को अधिक सीटें मिलेंगी। हम 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, उसकी जमीनी स्थिति मजबूत नहीं है जबकि माले की जमीनी स्थिति काफी मजबूत है। हमारी पार्टी का अलग पहचान है। बिहार में हमारी पार्टी अपने जमीनी संगठन के लिए जानी जाती है। यह बात सबको पता है। इसलिए हम चाहते हैं कि सभी दलों के ताकत का इस्तेमाल महागठबंधन में सही तरीके से हो।