VAISHALI: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने संसदीय क्षेत्र हाजीपुर दौरे के दौरान कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने एमएलसी चुनाव, गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और समस्तीपुर के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के भारतीय टीम में चयन जैसे विषयों पर प्रतिक्रिया दी।
सबसे पहले चिराग पासवान ने समस्तीपुर के उभरते क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम में चयनित होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बिहार के लिए यह गर्व का क्षण है और वैभव जैसे युवा खिलाड़ियों की सफलता राज्य के अन्य युवाओं को भी प्रेरित करेगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरेच पार्टी के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर चिराग पासवान ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद और चर्चा से निकलता है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर अड़ने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना अधिक उचित होता है।
एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से चिंताजनक स्थिति है, लेकिन इसे एक असाधारण परिस्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए। चिराग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बीच हालात को संभालने का प्रयास किया है।
वहीं, बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता उपेंद्र कुशवाहा को लगे झटके और भाजपा-आरएलएम के बीच समन्वय को लेकर पूछे गए सवाल पर चिराग पासवान ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत कुछ पदों को छोड़ना पड़ सकता है, लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि भाजपा और आरएलएम के बीच आवश्यक संवैधानिक व्यवस्था क्यों नहीं बन पाई।
उन्होंने लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी उनकी पार्टी को अधिक सीटें मिलने पर कई तरह के सवाल उठाए गए थे, लेकिन बाद में सभी मुद्दों का समाधान हो गया था। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसी स्थिति क्यों बनी, इसका जवाब भाजपा और आरएलएम को ही देना चाहिए।
चिराग पासवान ने स्पष्ट कहा कि भाजपा और आरएलएम के बीच क्या बातचीत हुई थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि यदि कोई संवैधानिक बाधा थी तो उसे दूर करने के लिए क्या प्रयास किए गए और व्यवस्था क्यों नहीं बन सकी, इसका जवाब दोनों दलों को देना चाहिए।
वैशाली से मुन्ना खान की रिपोर्ट



