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Expressway Bihar : बक्सर से भागलपुर अब सिर्फ 4 घंटे! गंगा किनारे बनेगा 350 KM का फोरलेन एक्सप्रेस-वे; इन जिलों के लोगों को मिलेगा फायदा

बिहार में गंगा किनारे 350 KM लंबा फोरलेन एक्सप्रेस-वे बनाने की बड़ी योजना है। बक्सर से भागलपुर तक बांध के ऊपर सड़क बनेगी। 12 जिलों को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर से सफर 8-9 घंटे से घटकर करीब 4 घंटे होने की उम्मीद है।

Expressway Bihar : बक्सर से भागलपुर अब सिर्फ 4 घंटे! गंगा किनारे बनेगा 350 KM का फोरलेन एक्सप्रेस-वे; इन जिलों के लोगों को मिलेगा फायदा
Tejpratap
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6 मिनट

Expressway Bihar :  बिहार में सड़क कनेक्टिविटी और बाढ़ प्रबंधन को लेकर एक बड़ी योजना सामने आई है। अगर प्रस्तावित मास्टरप्लान जमीन पर उतरता है, तो बक्सर से भागलपुर तक का सफर पहले के मुकाबले काफी आसान और तेज हो सकता है। जल संसाधन विभाग की योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों पर ऊंचे बांध बनाए जाने हैं और इन्हीं बांधों के ऊपर 4 लेन का एक्सप्रेस-वे विकसित करने का प्रस्ताव है। यह पूरा कॉरिडोर करीब 350 किलोमीटर लंबा होगा।

फिलहाल बक्सर से भागलपुर सड़क मार्ग से जाने में करीब 8 से 9 घंटे तक लग जाते हैं। प्रस्तावित फोरलेन कॉरिडोर तैयार होने के बाद यह दूरी करीब 4 घंटे में पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी पश्चिमी बिहार से पूर्वी बिहार तक आवागमन के समय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

बाढ़ से बचाव के साथ बनेगा हाईवे

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, जल संसाधन विभाग ने बिहार को बाढ़ की समस्या से राहत दिलाने के लिए एक बड़े मास्टरप्लान पर काम शुरू किया है। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ सड़क बनाना नहीं है, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, नदी की क्षमता बढ़ाने और गंगा किनारे परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना भी है।

प्रस्ताव के अनुसार बक्सर से भागलपुर तक गंगा के दोनों किनारों पर ऊंचे बांध बनाए जाएंगे। इन बांधों के ऊपर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस तरह एक तरफ बांध बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में मदद करेंगे तो दूसरी तरफ उनके ऊपर बनने वाला फोरलेन सड़क मार्ग क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा।

योजना के तहत करीब 350 किलोमीटर के हिस्से में गंगा से गाद निकालने का भी प्रस्ताव है। गाद हटने से नदी की गहराई और जलधारण क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे बाढ़ के दौरान पानी के बहाव को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

गंगा किनारे के 12 जिले सीधे जुड़ेंगे

इस प्रस्तावित कॉरिडोर की खास बात यह है कि यह बिहार के 12 जिलों को गंगा के दोनों तटों के जरिए जोड़ने की दिशा में काम करेगा।गंगा के उत्तरी तट पर सारण (छपरा), वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार शामिल हैं। वहीं दक्षिणी तट पर बक्सर, भोजपुर (आरा), पटना, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर को जोड़े जाने की योजना है।

अगर यह परियोजना पूरी होती है तो बिहार के पश्चिमी हिस्से से लेकर पूर्वी हिस्से तक सड़क नेटवर्क और मजबूत हो सकता है। इन जिलों के बीच यात्रा करने वाले लोगों के साथ-साथ कारोबार और माल ढुलाई को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

जहां छोटी नदियां मिलेंगी, वहां बनेंगे पुल

गंगा के किनारे लगातार सड़क बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि रास्ते में कई छोटी-बड़ी नदियां और जलधाराएं मिलती हैं। ऐसे स्थानों पर छोटे पुल बनाए जाने का प्रस्ताव है।इसका उद्देश्य पूरे कॉरिडोर को लगातार जोड़ना है, ताकि यात्रियों को बार-बार रास्ता बदलने या नदी पार करने के लिए अलग मार्ग लेने की जरूरत न पड़े।

गंगा की चौड़ाई बक्सर से भागलपुर तक कई गुना

इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक गंगा में जमा होने वाली गाद है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बक्सर के पास गंगा की चौड़ाई करीब 4 किलोमीटर है, जबकि भागलपुर की तरफ पहुंचते-पहुंचते यह करीब 20 से 22 किलोमीटर तक हो जाती है।

अलग-अलग राज्यों और नेपाल से आने वाली नदियां गंगा में भारी मात्रा में पानी के साथ गाद भी लाती हैं। यही गाद कई हिस्सों में नदी के तल में जमा होती रहती है। मास्टरप्लान में गाद निकालने के साथ नदी की धारा और तटों को व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया गया है।

सोन समेत चार नदियों पर बैराज का प्रस्ताव

मास्टरप्लान में सिर्फ गंगा तक सीमित काम नहीं है। सोन नदी पर नए बैराज का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके अलावा उत्तर बिहार की बागमती, बूढ़ी गंडक और महानंदा नदियों पर भी बैराज बनाने की योजना पर काम चल रहा है।इन परियोजनाओं के लिए अध्ययन और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। जल संसाधन विभाग का लक्ष्य दिसंबर तक डीपीआर तैयार करने का बताया गया है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने और चरणबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ने की उम्मीद है।

जेपी गंगा पथ से भी जुड़ेगा कनेक्टिविटी नेटवर्क

पटना में चल रहा जेपी गंगा पथ भी इस पूरे कनेक्टिविटी नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। दीघा से दीदारगंज तक करीब 20.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो चुका है। इसके आगे दूसरे चरण में दीघा से शेरपुर और शेरपुर से कोईलवर तक काम चल रहा है।

वहीं कोईलवर से बक्सर तक के हिस्से का अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे में अगर गंगा किनारे प्रस्तावित फोरलेन कॉरिडोर और जेपी गंगा पथ की योजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो बिहार में पश्चिम से पूर्व तक गंगा के समानांतर एक बड़ा सड़क नेटवर्क तैयार हो सकता है।यानी आने वाले समय में गंगा सिर्फ बिहार की जीवनरेखा ही नहीं, बल्कि तेज सड़क कनेक्टिविटी और बाढ़ प्रबंधन के एक बड़े कॉरिडोर के रूप में भी नजर आ सकती है।