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IIT पटना की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: बिहार के 9 पुलों की सुरक्षा पर संकट, तत्काल मरम्मत की सिफारिश

Bihar News: आईआईटी पटना की रिपोर्ट में बिहार के 85 में से 9 पुलों को तत्काल मरम्मत योग्य बताया गया है। सरकार ने सुरक्षा को देखते हुए जल्द मरम्मत और मजबूतीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार में पुलों की सुरक्षा को लेकर चल रहे व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट के तहत आईआईटी पटना ने पथ निर्माण विभाग को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। अगवानी घाट पुल हादसे के बाद राज्य सरकार ने सभी प्रमुख पुलों का ऑडिट कराने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में जून 2025 से ऑडिट कार्य शुरू किया गया था।


आईआईटी पटना को राज्य के कुल 85 पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की जिम्मेदारी दी गई थी, जिनमें से अब तक 47 पुलों की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो चुकी है। शेष पुलों की रिपोर्ट भी जल्द सौंपे जाने की संभावना है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा रिपोर्ट के अध्ययन में यह पाया गया है कि 9 पुल ऐसे हैं, जिनमें तत्काल मरम्मत और मजबूतीकरण की आवश्यकता है।


मुजफ्फरपुर में दो पुलों की स्थिति को गंभीर बताया गया है, जिनमें स्टेशन के पास स्थित पुल और बैरिया से जीरो माइल के बीच गंडक नदी पर बना पुल शामिल है। गया जिले में तीन पुलों को मरम्मत योग्य पाया गया है, जिनमें बसातपुर–सिंलौंजा मार्ग, चटकी–दरियापुर–गोरा रोड और राजबिगहा–बेलदार बिगहा के बीच स्थित पुल शामिल हैं।


लखीसराय में दो पुलों में सुधार की जरूरत बताई गई है, जिनमें एक आरओबी के पास और दूसरा शहर क्षेत्र में स्थित पुल शामिल है। वहीं हाजीपुर में रेलवे के पुराने पुल के पास बने एक पुल को भी मरम्मत सूची में रखा गया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मरम्मत प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए अलग से निविदा जारी की जाएगी।


पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने अधिकारियों को आईआईटी पटना की रिपोर्ट का सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने लखीसराय के एक पुल को लेकर विशेष प्राथमिकता पर कार्रवाई करने के भी आदेश दिए हैं।


आईआईटी पटना द्वारा फिलहाल 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जा रहा है। जबकि 60 मीटर से कम लंबाई वाले पुलों का रखरखाव रोड मेंटेनेंस पॉलिसी के तहत संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों द्वारा किया जाता है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता