Bihar News : बिहार में सड़क और पुलों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार अब स्टेट हाईवे पर स्थित 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों पर टोल टैक्स वसूलने की तैयारी में है। इसके लिए पथ निर्माण विभाग ने सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सर्वे पूरा होने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन-किन पुलों पर टोल लागू होगा और अलग-अलग श्रेणी के वाहनों से कितनी राशि ली जाएगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलों और सड़कों के रखरखाव के लिए स्थायी राजस्व जुटाना है। इससे भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर के बेहतर संचालन और मरम्मत का खर्च आसानी से पूरा किया जा सकेगा।
94 पुलों का किया जा रहा आकलन
पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाले लगभग 94 बड़े पुलों का अध्ययन किया जा रहा है। इनमें से फिलहाल 10 प्रमुख पुलों की पहचान की गई है, जहां टोल टैक्स लागू किए जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक पुल की लंबाई, उस पर प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या, आसपास की आबादी, शहर से उसकी दूरी और राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा से उसकी निकटता जैसे कई पहलुओं का विश्लेषण किया जाएगा। इसी आधार पर यह तय होगा कि किस पुल पर टोल लगाया जाए और उसकी दर क्या हो।
इन प्रमुख पुलों पर लग सकता है टोल
प्रारंभिक सूची में जिन पुलों को शामिल किया गया है, उनमें—
बख्तियारपुर-ताजपुर पुल
नवगछिया-कोसी नदी पुल
आरा-छपरा पुल
कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल
दरभंगा-करेह नदी पुल
गोपालगंज-बेतिया क्षेत्र का पुल
गया-फल्गु नदी पुल
सहरसा का बलुआहा घाट पुल
खगड़िया का फुलतौरा घाट पुल
नालंदा का सकरी पुल
शामिल हैं। विभाग का कहना है कि यह सूची अंतिम नहीं है और सर्वे के बाद इसमें बदलाव भी हो सकता है।
कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी
हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने 'बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली' को मंजूरी दी थी। इस नियमावली के तहत राज्य सरकार को सड़क और पुलों पर उपयोगकर्ता शुल्क यानी टोल टैक्स निर्धारित करने और उसकी वसूली का अधिकार मिला है। सरकार का मानना है कि जिन परियोजनाओं पर भारी निवेश किया गया है, उनके रखरखाव के लिए नियमित आय का स्रोत जरूरी है। इसी उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
सर्वे के बाद तय होगी टोल दर
अधिकारियों के मुताबिक अभी किसी भी पुल के लिए टोल की राशि तय नहीं की गई है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक पुल की स्थिति और यातायात के दबाव का आकलन किया जाएगा। इसके बाद वाहन श्रेणी के अनुसार अलग-अलग टोल दरें निर्धारित की जाएंगी। सूत्रों के अनुसार अधिक ट्रैफिक वाले पुलों और प्रमुख स्टेट हाईवे को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि राजस्व संग्रह बेहतर हो सके और सड़क नेटवर्क के रखरखाव में इसका उपयोग किया जा सके।
एजेंसी करेगी टोल वसूली
टोल संग्रह की जिम्मेदारी किसी निजी एजेंसी या ऑपरेटर को दी जा सकती है। इसके लिए संबंधित स्टेट हाईवे और पुलों की नीलामी की जाएगी। जो एजेंसी सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने का प्रस्ताव देगी, उसे तय अवधि के लिए टोल वसूली का अधिकार मिल सकता है।
बताया जा रहा है कि पटना और गया क्षेत्र में 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल और बख्तियारपुर-ताजपुर पुल जैसी बड़ी परियोजनाओं को इस नई व्यवस्था के तहत प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में सड़क और पुलों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। हालांकि सरकार का दावा है कि इससे पुलों और सड़कों के रखरखाव की गुणवत्ता बेहतर होगी और भविष्य में यातायात सुविधाओं का विस्तार भी तेज गति से किया जा सकेगा।





