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स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा घोटाला: मुजफ्फरपुर के 3 निजी कॉलेजों पर कार्रवाई, भुगतान तुरंत रोका गया

Bihar Student Credit Card: सरकारी योजना का फायदा उठाने के नाम पर कुछ ऐसा हुआ, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं… मुजफ्फरपुर के कुछ निजी कॉलेज अब जांच के घेरे में हैं। आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों अचानक लिया गया इतना बड़ा फैसला?

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा घोटाला: मुजफ्फरपुर के 3 निजी कॉलेजों पर कार्रवाई, भुगतान तुरंत रोका गया
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar Student Credit Card: बिहार में छात्रों के भविष्य को संवारने के लिए चलाई जा रही स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर कुछ निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अनियमितता और मुनाफाखोरी की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर के तीन निजी कॉलेजों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।


क्या है स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना

बिहार सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत छात्रों को 4 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इस योजना की खास बात यह है कि पढ़ाई पूरी होने के एक साल बाद ही लोन चुकाना शुरू करना होता है। यदि छात्र को नौकरी या रोजगार नहीं मिलता है, तो उसे भुगतान के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जाता है।


निजी संस्थानों पर लगे गंभीर आरोप

सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी शिक्षण संस्थान इस योजना का गलत फायदा उठा रहे हैं। ये संस्थान बड़े-बड़े होर्डिंग और विज्ञापनों के जरिए छात्रों को आकर्षित करते हैं और योजना का लाभ दिलाने का दावा करते हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि कई कॉलेज तय सीटों से अधिक छात्रों का नामांकन दिखाकर फर्जी तरीके से योजना का लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे।


तीन कॉलेजों पर बड़ी कार्रवाई

इसी मामले में बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड ने सख्त रुख अपनाते हुए मुजफ्फरपुर के तीन निजी संस्थानों—एमपीएस कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन, शिवि कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन और देव कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन—के नए आवेदनों के भुगतान पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई सत्र 2025-26 में निर्धारित सीटों से अधिक बोनाफाइड जारी करने और संतोषजनक जवाब नहीं देने के कारण की गई है।


जांच में क्या आया सामने

विभागीय जांच के दौरान यह पाया गया कि इन संस्थानों ने न सिर्फ तय सीमा से ज्यादा नामांकन दिखाया, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन स्वीकृति की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता की कमी रही। जब इन कॉलेजों से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो वे स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देने में असफल रहे, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया।


छात्रों के हितों का रखा गया ध्यान

सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस कार्रवाई का असर उन छात्रों पर नहीं पड़ेगा, जिनकी पहले से लोन की किस्त जारी हो चुकी है। ऐसे छात्रों को आगे की किस्त मिलती रहेगी, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। हालांकि, जिन नए आवेदनों में अनियमितता पाई गई है, उन पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।