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Bihar News : अब नहीं लगाना होगा दफ्तरों का चक्कर! बिहार में शुरू हुआ सहयोग शिविर अभियान; डिप्टी सीएम ने कहा - 30 दिन में शिकायत नहीं सुलझी तो अधिकारियों पर होगा एक्शन

बिहार सरकार ने पूरे राज्य में सहयोग शिविर अभियान की शुरुआत की है। अब आम लोग अपनी शिकायत सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और 30 दिन में समाधान का दावा।

Bihar News : अब नहीं लगाना होगा दफ्तरों का चक्कर! बिहार में शुरू हुआ सहयोग शिविर अभियान; डिप्टी सीएम ने कहा - 30 दिन में शिकायत नहीं सुलझी तो अधिकारियों पर होगा एक्शन
Tejpratap
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Bihar News : बिहार सरकार ने आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आज से पूरे राज्य में “सहयोग शिविर” अभियान की शुरुआत कर दी है। सरकार की इस नई पहल को जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस शिविर के जरिए अब आम नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे।


सरकार का कहना है कि जिन लोगों को किसी विभाग, योजना या सरकारी कार्यालय से जुड़ी कोई परेशानी है, वे सहयोग शिविर में जाकर आवेदन दे सकते हैं। आवेदन मिलने के बाद उसका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा और फिर तय समयसीमा के भीतर समस्या के समाधान की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि शिकायतों का निपटारा पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए।


इस कार्यक्रम को लेकर नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि जनता की समस्याओं को जमीन पर हल करने का प्रयास है। शिविर में पहुंचने वाले फरियादियों को यह जानकारी भी दी जाएगी कि उनकी शिकायत किस स्तर पर लंबित है और उसका समाधान कब तक संभव है।


सरकार की ओर से साफ किया गया है कि अगर किसी समस्या का समाधान संभव नहीं होगा तो संबंधित व्यक्ति को उसकी वजह भी बताई जाएगी। यानी फरियादियों को केवल आश्वासन नहीं बल्कि स्पष्ट जानकारी दी जाएगी कि किस कारण से काम पूरा होने में दिक्कत आ रही है। इससे लोगों को सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता समझने में भी मदद मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने इस अभियान को लेकर अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी शिकायत का समाधान 30 दिनों के भीतर नहीं होता और इसमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रशासनिक महकमे में भी हलचल बढ़ गई है।


इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा “छुट्टी हो जाएगी” वाली बात का मतलब सरकारी दंड से है। कार्यपालिका नियमावली में पहले से ही यह प्रावधान है कि जो अधिकारी अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं करते, वे कार्रवाई के पात्र होते हैं। ऐसे में सरकार अब उसी नियम को सख्ती से लागू करने की बात कर रही है।


सहयोग शिविर को लेकर ग्रामीण और शहरी इलाकों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शिविरों में मौजूद रहेंगे ताकि मौके पर ही शिकायतों की सुनवाई की जा सके। माना जा रहा है कि इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी।


सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से जनता का भरोसा बढ़ेगा और प्रशासनिक जवाबदेही भी मजबूत होगी। अब देखना होगा कि यह अभियान जमीन पर कितना असरदार साबित होता है और लोगों की समस्याओं का समाधान तय समय में हो पाता है या नहीं।