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Bihar News : फर्जी सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी? बिहार में रग्बी कोटे के 25 खिलाड़ियों की जांच, वीडियो फुटेज से खुलेगा पूरा राज

बिहार में खेल कोटे से सरकारी नौकरी पाने वाले 25 रग्बी खिलाड़ियों की जांच शुरू होने जा रही है। वीडियो फुटेज, मैच रिकॉर्ड और सर्टिफिकेट के आधार पर होगी पड़ताल। क्या सामने आएगा बड़ा खुलासा? पूरी खबर पढ़ें।

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Tejpratap
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Bihar News :  बिहार सरकार की 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना के तहत खेल कोटे से मिली सरकारी नौकरियों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक खिलाड़ी के कथित फर्जी प्रमाणपत्र के खुलासे के बाद अब बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने रग्बी खेल से नौकरी पाने वाले करीब 25 खिलाड़ियों के दस्तावेजों और खेल रिकॉर्ड की जांच कराने का फैसला किया है। जांच में केवल प्रमाणपत्र ही नहीं, बल्कि संबंधित प्रतियोगिताओं की वीडियो फुटेज, मैच रिकॉर्डिंग और पुरस्कार वितरण समारोह के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे।


खेल प्राधिकरण के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिस खिलाड़ी ने सरकारी नौकरी पाने के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का दावा किया है, वह वास्तव में मैदान पर उतरा था या नहीं। इसके लिए संबंधित राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के रिकॉर्ड रग्बी इंडिया से भी मांगे जाएंगे। यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित खिलाड़ियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


सुधांशु कुमार मामले के बाद बढ़ी सख्ती

जांच की शुरुआत रग्बी खिलाड़ी सुधांशु कुमार से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के बाद हुई है। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2022 में आयोजित जूनियर नेशनल रग्बी चैंपियनशिप का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर खेल कोटे से सरकारी नौकरी हासिल की थी। बाद में जांच में दावा किया गया कि चयनित टीम में उनका नाम जरूर था, लेकिन वास्तविक मुकाबलों में उनकी जगह किसी अन्य खिलाड़ी ने हिस्सा लिया।


मामले के सामने आने के बाद बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने सुधांशु कुमार को निलंबित कर दिया था। जांच के दौरान एक संविदा कोच की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। इसी प्रकरण के बाद अब पूरे रग्बी कोटे की नियुक्तियों की व्यापक जांच का निर्णय लिया गया है।


वीडियो और मैच रिकॉर्ड से होगा सत्यापन

खेल प्राधिकरण का कहना है कि केवल प्रमाणपत्र के आधार पर जांच नहीं होगी। संबंधित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की वीडियो रिकॉर्डिंग, खिलाड़ियों की भागीदारी, टीम सूची और पुरस्कार वितरण समारोह के फुटेज का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि दस्तावेजों में दर्ज खिलाड़ी और मैदान पर खेलने वाला खिलाड़ी एक ही था या नहीं।


प्राधिकरण का मानना है कि खेल कोटे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। इससे भविष्य में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने की कोशिशों पर भी रोक लगेगी।


रग्बी संघ के सचिव पर भी लगे आरोप

इसी बीच बाढ़ निवासी राष्ट्रीय स्तर के रग्बी खिलाड़ी संजीव कुमार ने रग्बी फुटबॉल संघ ऑफ बिहार के सचिव पर भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि खेल कोटे में नियमों की अनदेखी कर एक अभ्यर्थी को नौकरी दिलाई गई, जबकि उसने आवश्यक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लिया था।


शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सभी नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच हो तो कई और अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।


सचिव ने आरोपों से किया इनकार

रग्बी फुटबॉल संघ ऑफ बिहार के सचिव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि टीम चयन और खिलाड़ियों के मैदान पर खेलने की प्रक्रिया में संघ की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर जांच कराई जाती है तो वे पूरा सहयोग देंगे


पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण का कहना है कि खेल कोटे से सरकारी नौकरी केवल वास्तविक खिलाड़ियों को ही मिले, इसके लिए सभी तथ्यों का गहन सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी खिलाड़ी ने फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देकर नौकरी प्राप्त की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण का मानना है कि इस जांच से खेल कोटे की विश्वसनीयता मजबूत होगी और भविष्य में पारदर्शी नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा।