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Bihar PhD Rules 2026 : बिहार में पीएचडी के नियम पूरी तरह बदले! NET-GATE वालों को 80% वेटेज, 3 साल से कम सेवा वाले शिक्षक नहीं बनेंगे गाइड

बिहार में पीएचडी करने वालों के लिए बड़ा अपडेट! अब NET-GATE स्कोर को मिलेगा 80% वेटेज, 3 साल से कम सेवा वाले शिक्षक नए शोधार्थियों के गाइड नहीं बन सकेंगे। जानिए नए नियमों की पूरी जानकारी।

Bihar PhD Rules 2026 : बिहार में पीएचडी के नियम पूरी तरह बदले! NET-GATE वालों को 80% वेटेज, 3 साल से कम सेवा वाले शिक्षक नहीं बनेंगे गाइड
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar PhD Rules 2026 : बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की पढ़ाई अब नए नियमों के तहत होगी। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम-2026 के अनुसार शोध में प्रवेश, गाइड नियुक्ति, कोर्स वर्क, मूल्यांकन और डिग्री प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों का उद्देश्य शोध की गुणवत्ता बढ़ाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाना है।


नए नियमों के तहत अब ऐसे शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय बचा है, वे नए पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन (गाइड) नहीं कर सकेंगे। हालांकि, पहले से उनके निर्देशन में शोध कर रहे विद्यार्थियों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शोधार्थी अपना शोधकार्य समय पर और बिना किसी बाधा के पूरा कर सकें।


गाइड की संख्या भी तय

अध्यादेश में शोध निर्देशन की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। इसके अनुसार एक प्रोफेसर अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार शोधार्थियों का ही मार्गदर्शन कर सकेंगे। इससे एक ही शिक्षक पर अत्यधिक शोधार्थियों का दबाव कम होगा और प्रत्येक छात्र को बेहतर अकादमिक मार्गदर्शन मिल सकेगा।


NET, GATE और इंटरव्यू के आधार पर होगा प्रवेश

पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया को भी पूरी तरह संशोधित किया गया है। अब प्रवेश केवल यूजीसी-नेट, यूजीसी-सीएसआईआर नेट या गेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों को ही मिलेगा। अंतिम मेरिट सूची तैयार करने में 80 प्रतिशत वेटेज नेट या गेट स्कोर को दिया जाएगा, जबकि 20 प्रतिशत अंक इंटरव्यू के आधार पर जोड़े जाएंगे। विश्वविद्यालय उपलब्ध सीटों की तुलना में अधिकतम तीन गुना अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुला सकेंगे। इससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनने की उम्मीद है।


12 क्रेडिट का कोर्स वर्क अनिवार्य

सभी पीएचडी शोधार्थियों के लिए 12 क्रेडिट का कोर्स वर्क अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें रिसर्च मेथडोलॉजी और रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स जैसे विषय शामिल होंगे। कोर्स वर्क में सफल होने के लिए विद्यार्थियों को कम से कम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही वे शोध कार्य को आगे बढ़ा सकेंगे।


शोध पत्र प्रकाशित करना होगा जरूरी

नई व्यवस्था के तहत पीएचडी की थीसिस जमा करने से पहले प्रत्येक शोधार्थी को कम से कम एक शोध पत्र प्रकाशित कराना होगा। इसके अलावा किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया गया है। इससे शोध कार्य की गुणवत्ता और उसकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।


शिक्षण और रिसर्च असिस्टेंटशिप भी होगी

विश्वविद्यालयों को यह अधिकार दिया गया है कि वे पीएचडी शोधार्थियों से प्रति सप्ताह चार से छह घंटे तक शिक्षण कार्य या रिसर्च असिस्टेंटशिप का दायित्व निभाने के लिए कह सकें। इससे शोधार्थियों को शिक्षण अनुभव मिलेगा और विश्वविद्यालयों को भी शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग प्राप्त होगा।


नए पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम-2026 के लागू होने के बाद बिहार के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में शोध कार्य इसी नई व्यवस्था के अनुरूप संचालित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इन बदलावों से शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा, प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान का स्तर मजबूत होगा।