Bihar News : बिहार की राजनीति में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जैसे-जैसे अंतिम चरण में पहुंच रही है, वैसे-वैसे सत्ता के प्रमुख पदों को लेकर सियासी हलचल तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री पद के साथ अब सबसे ज्यादा चर्चा विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर हो रही है। वर्तमान में यह पद भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रेम कुमार के पास है, लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) इस पद पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगर इस बार मुख्यमंत्री भाजपा कोटे से बनता है, तो जदयू विधानसभा अध्यक्ष का पद अपने खाते में लेने की कोशिश करेगा। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में एनडीए सरकार के भीतर एक तरह की अनौपचारिक परंपरा विकसित हो गई थी। जब मुख्यमंत्री जदयू से होते थे, तब विधानसभा अध्यक्ष भाजपा का होता था। इसी फार्मूले के तहत नंदकिशोर यादव, विजय कुमार सिन्हा और वर्तमान में डॉ. प्रेम कुमार इस पद पर काबिज रहे।
अब चूंकि परिस्थितियां बदल रही हैं और मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाने की संभावना जताई जा रही है, ऐसे में जदयू इस संतुलन को अपने पक्ष में करना चाहता है। सूत्रों के अनुसार, अगले पांच दिनों में मुख्यमंत्री के नाम के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर भी सहमति बन सकती है। 14 अप्रैल तक इस पूरे मसले पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
इतिहास पर नजर डालें तो बिहार में सत्ता संतुलन को बनाए रखने के लिए अलग-अलग दलों के बीच पदों का बंटवारा होता रहा है। जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, तब राष्ट्रीय जनता दल के अवध बिहारी चौधरी को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था। वहीं, एनडीए के शुरुआती दौर में ऐसी स्थिति भी रही है जब मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष दोनों ही जदयू से थे। उस समय उदय नारायण चौधरी दो बार इस पद पर रहे, जबकि विजय चौधरी भी एक बार विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं।
मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में जदयू केवल विधानसभा अध्यक्ष पद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह सरकार में अन्य महत्वपूर्ण विभागों पर भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। पार्टी की स्पष्ट इच्छा है कि गृह विभाग भी उसके पास रहे। गौरतलब है कि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास रखा था। हालांकि, बाद में नई व्यवस्था में यह विभाग उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दिया गया।
अब जदयू चाहता है कि नई सरकार में गृह विभाग उसके कोटे से आने वाले उपमुख्यमंत्री को दिया जाए। सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री पद के लिए विजय चौधरी और निशांत कुमार के नामों की चर्चा चल रही है। अगर विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री बनते हैं, तो विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के किसी अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) के नेता को दिए जाने की संभावना बढ़ जाएगी।
यह कदम जदयू के सामाजिक समीकरण को साधने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। बिहार की राजनीति में अतिपिछड़ा वर्ग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, और इस वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर जदयू अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है।
कुल मिलाकर, बिहार में नई सरकार का गठन केवल मुख्यमंत्री के नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता संतुलन, सामाजिक समीकरण और सहयोगी दलों के बीच तालमेल का पूरा गणित इसमें शामिल है। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं, जब यह तय होगा कि सत्ता की कुर्सियों पर कौन बैठेगा और किस दल को कितनी हिस्सेदारी मिलेगी।






