Bihar News: बिहार में चल रही बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने चार महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि अब काम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा करना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, चाहे इसके लिए अतिरिक्त संसाधन ही क्यों न लगाने पड़ें।
समीक्षा बैठक के दौरान सबसे ज्यादा फोकस सुलतानगंज-अगुवानी घाट पुल और बख्तियारपुर-ताजपुर महासेतु पर रहा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सुलतानगंज-अगुवानी घाट पुल का एप्रोच रोड मई 2026 तक हर हाल में पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाए, मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और काम की गति को दोगुना किया जाए। साथ ही उन्होंने सुरक्षा जांच से जुड़ी रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने और रेलवे विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी हिदायत दी।
वहीं दूसरी ओर बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु परियोजना को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। करीब 1822.23 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह बिहार की सबसे अहम आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक है, जिसे किसी भी हाल में मई 2027 तक पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि काम की प्रगति पर हर हफ्ते निगरानी की जाएगी और किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा को तुरंत दूर किया जाए।
बैठक में उत्तर कोयल जलाशय योजना की भी समीक्षा की गई, जिसमें अब तक केवल लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा हो पाया है। इस पर असंतोष जताते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि मानसून शुरू होने से पहले निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और 30 अप्रैल तक जमीन अधिग्रहण से जुड़े सभी लंबित मामलों को निपटा लिया जाए, ताकि आगे काम में कोई रुकावट न आए।
इसके अलावा 232.83 करोड़ रुपये की मंडई वीयर परियोजना पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना में मैनपावर और मशीनरी की कमी को लेकर मुख्य सचिव ने तत्काल सुधार के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले नहरों की खुदाई और मिट्टी से जुड़े सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि आगे किसी प्रकार की देरी न हो।
मुख्य सचिव ने बैठक के अंत में दो टूक शब्दों में कहा कि अब “बहाने नहीं चलेंगे, सिर्फ रिजल्ट चाहिए।” उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि अगर तय समय में प्रगति नहीं दिखी तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं की रफ्तार और तेज हो सकती है, जिससे बिहार के बुनियादी ढांचे को बड़ी मजबूती मिलेगी।


