पटना: बिहार में आम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को राज्य में ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग करेंगी। सरकार का लक्ष्य करीब 6 करोड़ लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अभियान का शुभारंभ किया और जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
घर बैठे होगी बीमारी की पहचान
‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान का सबसे बड़ा मकसद गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की एएनएम और आशा कार्यकर्ता लोगों के घरों तक पहुंचेंगी। वहां लोगों का स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा और विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाएगी।
खास बात यह है कि किसी व्यक्ति में गंभीर बीमारी के लक्षण या बीमारी की पुष्टि होती है तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा बड़े अस्पताल में रेफर किया जाएगा। यानी बीमारी को गंभीर स्थिति तक पहुंचने से पहले ही पकड़ने की कोशिश की जाएगी।
2 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह अभियान 2 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। करीब तीन महीने तक बिहार के सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय रहेंगी। अभियान के पहले चरण में 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य बड़े पैमाने पर लोगों की स्क्रीनिंग कर ऐसे मरीजों की पहचान करना है, जिन्हें अपनी बीमारी के बारे में जानकारी तक नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गैर-संचारी रोग यानी ऐसी बीमारियां जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलतीं, लंबे समय तक शरीर में मौजूद रह सकती हैं और कई बार इनके लक्षण शुरुआत में स्पष्ट नहीं होते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
इन बीमारियों की होगी स्क्रीनिंग
इस अभियान में कई गंभीर और सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच पर विशेष जोर दिया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
डायबिटीज यानी मधुमेह
हाई ब्लड प्रेशर
मुंह का कैंसर
स्तन कैंसर
गर्भाशय के मुख का कैंसर
हृदय रोग
सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां
फैटी लिवर
इन बीमारियों की शुरुआती पहचान होने पर मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। इससे बीमारी के गंभीर होने और इलाज पर होने वाले खर्च को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
CM ने जिलाधिकारियों को दिए मॉनिटरिंग के निर्देश
अभियान के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी जिलाधिकारियों को अभियान की मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया। सरकार चाहती है कि अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें वास्तव में लोगों के घरों तक पहुंचें और पात्र लोगों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘मिशन कायाकल्प’ शुरू करने की भी घोषणा की। इसका उद्देश्य गांवों में मौजूद अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में किसी भी स्तर की कमी या परेशानी को दूर करना है।
गांवों के अस्पतालों पर भी रहेगा फोकस
‘मिशन कायाकल्प’ के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं, मरीजों को मिलने वाली सेवाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में जहां भी कमी होगी, उसे दूर करने की कोशिश की जाएगी। सरकार की योजना है कि लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर के शहरों या बड़े अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इसके लिए गांव और पंचायत स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अहम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- समय रहते बीमारी की पहचान जरूरी
कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि इस अभियान के जरिए बिहार के लोगों को घर-घर जाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीमारी की समय रहते पहचान होने पर उसका इलाज आसान हो जाता है और मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है।
क्यों अहम है यह अभियान?
बिहार जैसे बड़े राज्य में बड़ी आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और जब अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है।
ऐसे में ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान घर की दहलीज तक स्वास्थ्य जांच पहुंचाने की कोशिश है। यदि अभियान अपने लक्ष्य के मुताबिक लागू होता है तो लाखों लोगों को अपनी बीमारी के बारे में समय रहते जानकारी मिल सकती है और उन्हें उचित उपचार के लिए आगे भेजा जा सकेगा। यानी अब बिहार में स्वास्थ्य जांच के लिए सिर्फ अस्पताल का रुख करना जरूरी नहीं होगा—सरकार की स्वास्थ्य टीम खुद आपके दरवाजे तक पहुंचने वाली है।





