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बिहार में बाढ़ ने बढ़ाई सरकार की टेंशन: पटना में डिप्टी सीएम ने की जल संसाधन विभाग की हाई लेवल मीटिंग, सभी जिलों को अलर्ट जारी

बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद सरकार अलर्ट मोड में है। पटना में डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक कर सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

Bihar Flood Alert
बिहार में बाढ़ ने बढ़ाई सरकार की टेंशन
© Reporter
Mukesh Srivastava
5 मिनट

Bihar Flood Alert: बिहार में गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि से बाढ़ का खतरा गंभीर हो गया है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है और नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) के बेहद करीब बह रही है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।



पटना में डिप्टी सीएम की हाई लेवल मीटिंग

बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर प्रशासन से लेकर सरकार तक अलर्ट मोड में आ गई है। पटना में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। डिप्टी सीएम और जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों के साथ बैठक की है और संबंधित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। तटबंध के नदी भाग में बसे लोगों को स्थिति की जानकारी देने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिलास्तर पर गठित टीमों को लगातार गश्त करने का निर्देश दिया गया है।


विजय चौधरी का बड़ा बयान

जल संसाधन विभाग के मंत्री और डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने बैठक के बाद बड़ा बयान दिया और कहा कि गंगा अपने उच्चतम स्तर को पार कर गई है। जो 2016 में उच्चतम स्तर था, उसको गंगा ने आज 10:30 बजे दिन में पार कर लिया है।


उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।हर स्थान पर अधिकारी तैनात हैं। प्रशासन तैनात है और पूरी तरीके से बाहर को लेकर तैयारी की जा रही की जा रही है और हर परिस्थिति में निपटने के लिए प्रशासन और सरकार पूरी तरह तैयार है।



कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। गंगा दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर है। वहीं गंडक डुमरिया घाट और हाजीपुर, कोसी बलतारा और कुर्सैला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, पुनपुन श्रीपालपुर और घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।



बाढ़ प्रभावित जिलों में सामुदायिक रसोई शुरू

बाढ़ प्रभावित जिलों में जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। भागलपुर में गंगा के बढ़े जलस्तर से प्रभावित करीब 5 हजार लोगों के लिए छह सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन रसोई के माध्यम से अब तक 70,600 से अधिक थाली भोजन परोसा जा चुका है।



भोजपुर के चार प्रखंडों की करीब 2.84 लाख प्रभावित आबादी के लिए 13 सामुदायिक रसोई केंद्र सक्रिय हैं। पटना के नौ प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी के लिए आठ सामुदायिक रसोई चल रही हैं, जबकि सात नए स्थानों पर भी रसोई केंद्र शुरू किए गए हैं।



सारण में करीब 20 हजार प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई संचालित है। वैशाली में करीब 85 हजार प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाई जा रही है। यहां विशेष राहत शिविर में 326 लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है।



693 सरकारी नावें राहत में जुटीं

बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और सुरक्षित निकासी के लिए विभिन्न जिलों में 693 सरकारी नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनमें वैशाली में सबसे अधिक 155 नावें, समस्तीपुर में 88, भोजपुर में 87, पटना में 70, मधेपुरा में 58, खगड़िया में 43 और पूर्णिया में 35 सरकारी नावें चल रही हैं।



इसके अलावा अरवल, बक्सर, बेगूसराय, समस्तीपुर, खगड़िया, मुंगेर और कटिहार समेत अन्य प्रभावित जिलों में भी प्रशासन की ओर से राहत सामग्री, भोजन और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नदी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता