पटनाः बिहार में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। हर साल मानसून के दौरान राज्य के कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और गांवों का सड़क संपर्क टूट जाता है। ऐसे समय में लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, भोजन और दवाइयां उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है। लेकिन अब बिहार में बाढ़ से निपटने के लिए एक ऐसा अनोखा प्रयोग सामने आया है, जो भविष्य में हजारों लोगों के लिए राहत का नया रास्ता खोल सकता है।
सोचिए, अगर बाढ़ का पानी किसी गांव में घुस जाए और जमीन पर बने घरों के साथ-साथ घर भी पानी के स्तर के साथ ऊपर उठने लगें तो? बिहार के इंजीनियर प्रशांत कुमार इसी विचार को हकीकत में बदलने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा घर तैयार किया है, जो पानी बढ़ने के साथ ऊपर उठ सकता है और बाढ़ के दौरान पानी पर तैर सकता है। अब इसी तकनीक के आधार पर एक पूरा ‘फ्लोटिंग विलेज’ यानी तैरता हुआ गांव तैयार करने की योजना है।
बाढ़ आएगी तो डूबेगा नहीं, ऊपर उठेगा घर
प्रशांत कुमार ने फिलहाल तीन कमरों वाला एक ऐसा घर तैयार किया है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि बाढ़ का पानी बढ़ने पर घर भी उसके साथ ऊपर उठ सके। यानी सामान्य परिस्थितियों में यह एक सामान्य घर की तरह इस्तेमाल होगा, लेकिन बाढ़ की स्थिति में इसका ढांचा पानी के ऊपर तैरता रहेगा। अब इसी मॉडल के छह से सात और घर तैयार करने की तैयारी है। इन सभी घरों को एक-दूसरे से जोड़कर एक ऐसा फ्लोटिंग विलेज बनाने की योजना है, जहां बाढ़ के दौरान लोग सुरक्षित रह सकें और जरूरी सेवाएं भी जारी रखी जा सकें।
घर ही बन जाएगा रेस्क्यू सेंटर
इस प्रोजेक्ट की खासियत सिर्फ इतनी नहीं है कि घर पानी पर तैरेंगे। बाढ़ के समय इनका इस्तेमाल रेस्क्यू सेंटर, हेल्थ सेंटर, भोजन वितरण केंद्र और जरूरी सामान के स्टोरेज के तौर पर भी किया जा सकेगा। अगर किसी बाढ़ प्रभावित इलाके में सड़क और सामान्य आवागमन पूरी तरह बंद हो जाए, तो ऐसे तैरते केंद्र राहत एवं बचाव टीमों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां भी इनका इस्तेमाल अस्थायी राहत केंद्र के रूप में कर सकती हैं।
एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान
फ्लोटिंग विलेज की एक और खासियत इसकी मोबिलिटी है। जरूरत के मुताबिक इन तैरते हुए घरों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की योजना है। इसका मतलब यह हुआ कि बाढ़ की स्थिति जिस इलाके में ज्यादा गंभीर होगी, वहां इन फ्लोटिंग यूनिट्स को पहुंचाया जा सकता है। ऐसे में यह मॉडल सिर्फ घर के तौर पर नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलते-फिरते राहत केंद्र के रूप में भी काम कर सकता है।
‘मातृ धाम’ से शुरू हुआ प्रयोग
प्रशांत कुमार ने इस मॉडल का पहला प्रोटोटाइप ‘मातृ धाम’ नाम से आरा में तैयार किया था। इसके बाद इसे नदी के रास्ते बक्सर होते हुए पटना लाया गया। फिलहाल पटना में ऐसे तीन घर मौजूद हैं। इस प्रयोग को स्थानीय संसाधनों और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के साथ तैयार करने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ बाढ़ से बचाव ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और कम लागत वाले निर्माण की दिशा में भी एक अलग प्रयोग माना जा रहा है।
करीब 6 लाख रुपये में तैयार हुआ तीन कमरों का घर
जानकारी के मुताबिक, तीन कमरों वाले इस घर को तैयार करने में करीब 6 लाख रुपये की लागत आई है। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर सामग्री आसपास के करीब 10 किलोमीटर के दायरे से जुटाई गई। घर के निर्माण में रिसाइकल पाइप के साथ गाय के गोबर, चूना, गुड़ और चावल से तैयार पर्यावरण अनुकूल ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। इससे निर्माण में स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ता है और लागत को भी नियंत्रित रखने की कोशिश की गई है।
सोलर पैनल से बिजली, ड्राई टॉयलेट से कचरे का समाधान
इस फ्लोटिंग हाउस को आत्मनिर्भर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है। बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए इसमें सोलर पैनल लगाए गए हैं। वहीं, ड्राई टॉयलेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जो मानव अपशिष्ट को कंपोस्ट में बदलने में मदद करता है।घर के डिजाइन में हवा के बेहतर प्रवाह का भी ध्यान रखा गया है। इसका उद्देश्य गर्मियों में घर के अंदर अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण और सर्दियों में गर्माहट बनाए रखना है।
बिहार की बाढ़ समस्या के लिए बन सकता है नया मॉडल
बिहार में हर साल बाढ़ से बड़ी आबादी प्रभावित होती है। ऐसे में अगर फ्लोटिंग हाउस और फ्लोटिंग विलेज का यह प्रयोग बड़े स्तर पर सफल होता है, तो यह बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए एक वैकल्पिक मॉडल बन सकता है। सबसे बड़ी बात यह होगी कि बाढ़ के दौरान जब जमीन पर बने राहत केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, तब पानी पर तैरने वाले ये केंद्र खुद प्रभावित इलाकों के करीब पहुंचाए जा सकेंगे।
फिलहाल यह प्रोजेक्ट विस्तार के चरण में है, लेकिन अगर आने वाले समय में कई तैरते घरों को जोड़कर पूरा फ्लोटिंग विलेज तैयार हो जाता है, तो बिहार की बाढ़ से जूझने की कहानी में यह एक बेहद अनोखा और संभावनाओं से भरा प्रयोग साबित हो सकता है।




