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सम्राट सरकार ने बिहार में परीक्षा सुधार के लिए बनाई विशेषज्ञ समिति , पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार होंगे अध्यक्ष

बिहार सरकार ने पेपर लीक रोकने समेत सारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया गया है. राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार को समिति का अध्यक्ष बनाया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है.

बिहार न्यूज
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनी समिति
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

PATNA: बिहार सरकार ने राज्य में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं में व्यापक परीक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया है। इस समिति के अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार होंगे। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में 1 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर दी गई है।


सरकार का यह फैसला राज्य के विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में परीक्षा प्रणाली को लीकप्रूफ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिसूचना में कहा गया है कि राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों एवं अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में व्यापक परीक्षा सुधार की अनुशंसा के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रावधान किया गया है।


परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनी समिति

सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, राज्य सरकार ने 23 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना में परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रावधान किया था। इसी प्रावधान के तहत अब समिति के अध्यक्ष के रूप में पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार को मनोनीत किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 24 अगस्त 2026 को किए गए अनुरोध पर पटना हाईकोर्ट से मंजूरी मिली है. इसके बाद जस्टिस हरीश कुमार को समिति के अध्यक्ष के रूप में मनोनीत करने की मंजूरी दी गई है. 


बिहार की सारी परीक्षाएं होंगी समीक्षा के दायरे में

इस समिति के गठन का दायरा केवल किसी एक भर्ती परीक्षा या किसी एक परीक्षा लेने वाली संस्था तक सीमित नहीं है। अधिसूचना में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है।


इसका मतलब है कि समिति के सामने बिहार में होने लाली सभी परीक्षाओं का व्यापक अध्ययन और उनमें सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, जारी अधिसूचना में समिति द्वारा सुझाए जाने वाले सुधारों का विस्तृत खाका या उसकी समयसीमा का उल्लेख नहीं किया गया है।


भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में कदम

बिहार में सरकारी नौकरियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश से जुड़ी परीक्षाएं बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुचारु संचालन महत्वपूर्ण माना जाता है।सरकार की ओर से परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय इसी व्यापक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया कदम है। समिति के अध्यक्ष के रूप में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति को जिम्मेदारी दिए जाने से यह संकेत मिलता है कि सरकार परीक्षा प्रणाली से जुड़े सुधारों को संस्थागत और व्यापक स्तर पर देखने की तैयारी में है।

सरकार के कई प्रमुख विभागों और संस्थाओं को भेजी गई अधिसूचना

परीक्षा सुधार समिति से संबंधित अधिसूचना की प्रतियां राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और प्रमुख संस्थाओं को भी भेजी गई हैं। इनमें वित्त विभाग, महालेखाकार, राज्य सरकार के विभिन्न विभाग एवं विभागाध्यक्ष, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, उच्च न्यायालय, बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग और बिहार तकनीकी सेवा आयोग सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालय शामिल हैं।


परीक्षा सुधार के लिए आगे क्या होगा?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि विशेषज्ञ समिति अपनी कार्यप्रणाली किस प्रकार तय करती है और राज्य की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में किन क्षेत्रों में सुधार की सिफारिश करती है। अधिसूचना में समिति के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति हरीश कुमार की नियुक्ति स्पष्ट रूप से की गई है, लेकिन समिति की अन्य संरचना, विस्तृत कार्यक्षेत्र, बैठक की समयसीमा और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अवधि इस दस्तावेज में स्पष्ट नहीं की गई है।


फिलहाल सरकार का यह कदम बिहार में परीक्षा सुधार को संस्थागत रूप देने की दिशा में अहम पहल है। विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों की परीक्षाओं से जुड़े व्यापक सुधारों पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें आने के बाद राज्य की परीक्षा प्रणाली में संभावित बदलावों का रास्ता खुल सकता है।