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ट्रेन की चपेट में आने से कटे दोनों पैर, 45 मिनट तक एंबुलेंस का इंतजार; 112 पर भी नहीं मिली मदद

जमुई के झाझा में ट्रेन की चपेट में आने से युवक के दोनों पैर कट गए। परिजनों का आरोप है कि 102 एंबुलेंस करीब 45 मिनट बाद पहुंची, जबकि 112 सेवा से संपर्क नहीं हो सका।

बिहार न्यूज
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

JAMUI: बिहार के जमुई जिले के झाझा से स्वास्थ्य और आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली दर्दनाक घटना सामने आई है। नारगंजो रेलवे स्टेशन के समीप सोमवार शाम ट्रेन की चपेट में आने से एक व्यक्ति के दोनों पैर धड़ से अलग हो गए। हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल व्यक्ति करीब 45 मिनट तक घटनास्थल पर मदद का इंतजार करता रहा।


घटना झाझा थाना क्षेत्र के बालियाडीह गांव निवासी बॉबी दास के साथ हुई। बताया जाता है कि सोमवार शाम करीब चार बजे वह नारगंजो स्टेशन के पास अचानक रेलवे लाइन की ओर चले गए। इसी दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना गंभीर था कि उनके दोनों पैर कटकर अलग हो गए और वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में घटनास्थल पर पड़े रहे।


102 एंबुलेंस पहुंचने में लगा करीब 45 मिनट

पीड़ित के बड़े बेटे राजू दास के मुताबिक, उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की 102 एंबुलेंस सेवा और 112 आपातकालीन सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया।


परिजनों का आरोप है कि लगातार प्रयास के बाद करीब 45 मिनट में 102 एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची। वहीं, 112 आपातकालीन सेवा पर कॉल करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका।


स्थानीय लोगों के अनुसार, घटनास्थल से झाझा रेफरल अस्पताल की दूरी करीब 9 किलोमीटर है। ऐसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति तक एंबुलेंस पहुंचने में इतना समय लगने को लेकर ग्रामीणों ने आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की तत्परता पर सवाल उठाए हैं।


प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था पर भी सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने रजला गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। आसपास गंदगी का भी अंबार लगा रहता है।


ग्रामीणों का कहना है कि गंभीर रूप से घायल मरीज के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं के समय पर उपलब्ध नहीं होने से मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती है।


112 सेवा और एंबुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि 112 आपातकालीन सेवा से संपर्क क्यों नहीं हो सका? 102 एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में करीब 45 मिनट क्यों लगे? वहीं, महज 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अस्पताल तक घायल को जल्द पहुंचाने की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?


ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने तथा आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी आपातकालीन सेवाओं की तत्परता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी गंभीर मरीज को समय पर इलाज मिल सके।

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रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता