पटना: शिक्षक दिवस के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के शिक्षकों को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार जल्द ही शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक अलग विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से राज्य के शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में वर्तमान समय में 7 लाख से अधिक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामने बदलते समय और शिक्षा के नए तरीकों के अनुरूप खुद को अपडेट रखने की चुनौती भी है। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षण देकर उनकी कार्यक्षमता और शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए।
शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए बनेगा विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल स्कूलों में संसाधन उपलब्ध कराने से संभव नहीं है, बल्कि शिक्षकों को भी समय-समय पर नई तकनीक, नई शिक्षण पद्धति और बदलते शैक्षणिक माहौल के अनुसार प्रशिक्षित करना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से बिहार में शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए विशेष विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग जगहों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और एक संस्थागत व्यवस्था के तहत उन्हें प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री के इस ऐलान को बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिहार में BHU और BIT का विस्तार
शिक्षा के क्षेत्र में बिहार को मजबूत बनाने की बात करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) का सेंटर खोलने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा BIT Mesra के केंद्र के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है, जिसे वर्ष 2030 तक विस्तारित करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य बिहार में उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प तैयार करना है, ताकि राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की मजबूरी कम हो।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी को भी मिलेगा मौका
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में निजी विश्वविद्यालयों को भी जगह दी जाएगी। सरकार का प्रयास है कि राज्य में ही उच्च शिक्षा के अधिक से अधिक संस्थान विकसित हों और विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बिहार से बाहर नहीं जाना पड़े। उन्होंने संकेत दिया कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए विकल्प पैदा होंगे। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर बिहार में ही उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों को समय पर वेतन देने की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षकों के वेतन को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षकों को समय पर वेतन उपलब्ध कराने के लिए एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करने का निर्णय लिया है। सरकार का प्रयास है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को हर महीने वेतन के लिए इंतजार न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को समय पर वेतन मिलना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को सितंबर में वेतन
मुख्यमंत्री ने मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार इसी सितंबर महीने में इन शिक्षकों के बकाया वेतन का भुगतान करने की दिशा में काम करेगी।इस घोषणा से लंबे समय से वेतन भुगतान को लेकर इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वित्त रहित शिक्षकों के लिए नए वेतनमान की तैयारी
बिहार में लंबे समय से चर्चा में रहे वित्त रहित शिक्षकों के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की योजना स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब इस व्यवस्था में एक नया सिस्टम तैयार करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, वित्त रहित शिक्षकों को अब तक सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग दिया जाता रहा है और संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। लेकिन अब सरकार इस पूरी व्यवस्था को नए तरीके से व्यवस्थित करने पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि संस्थानों की आंतरिक प्रक्रिया और सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान को एक साथ जोड़कर नए वेतनमान की व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो वित्त रहित शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। लंबे समय से ये शिक्षक नियमित और सम्मानजनक वेतन व्यवस्था की मांग करते रहे हैं। सरकार की इस घोषणा से उनके बीच नई उम्मीद जगी है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत
शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणाओं को देखें तो सरकार का फोकस केवल शिक्षकों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। प्रशिक्षण, समय पर वेतन, उच्च शिक्षा के नए संस्थान और वित्त रहित शिक्षकों की वेतन व्यवस्था जैसे मुद्दों पर एक साथ काम करने की बात कही गई है।अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर होगी कि शिक्षकों के प्रशिक्षण विश्वविद्यालय की स्थापना कब तक होती है, वेतन भुगतान का नया इकोसिस्टम किस तरह लागू होता है और वित्त रहित शिक्षकों के लिए प्रस्तावित नए वेतनमान को कब तक जमीन पर उतारा जाता है। शिक्षक दिवस के मौके पर किए गए ये ऐलान बिहार की शिक्षा व्यवस्था में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।





