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Census 2027 : बिहार में जनगणना 2027 को लेकर बड़ा बदलाव! बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म पर रोक; जानें पूरा नियम

बिहार में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है, जहां बाहर पढ़ाई कर रहे छात्र सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म नहीं भर सकेंगे, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं।

Census 2027 : बिहार में जनगणना 2027 को लेकर बड़ा बदलाव! बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म पर रोक;  जानें पूरा नियम
Tejpratap
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Census 2027 : बिहार में देश की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया, जनगणना 2027, को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही हैं। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होने वाली है, क्योंकि इसे डिजिटल तरीके से भी संपन्न किया जाएगा। हालांकि, इसी बीच एक महत्वपूर्ण बदलाव ने छात्रों के बीच चर्चा तेज कर दी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जो छात्र राज्य से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, वे इस बार ‘सेल्फ-इन्युमरेशन’ यानी खुद ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकेंगे।


पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने इस संबंध में स्पष्ट जानकारी देते हुए कहा कि इस बार जनगणना के नियमों को अधिक व्यवस्थित और सख्त बनाया गया है, ताकि आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि 2 मई से शुरू होने वाले पहले चरण के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है और इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा चुकी है।


क्या है सेल्फ-इन्युमरेशन का नियम?

जनगणना 2027 के तहत 2 मई से 31 मई तक पहले चरण में मकानों की गिनती की जाएगी। इसके पहले 1 मई तक नागरिकों को एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 33 सवालों के जवाब देकर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का मौका दिया गया है। इसे ही ‘सेल्फ-इन्युमरेशन’ कहा जाता है।


लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव यह है कि बिहार से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे छात्र इस सुविधा का उपयोग नहीं कर पाएंगे। प्रशासन का मानना है कि ऐसे मामलों में सही स्थान और स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए फील्ड सर्वे अधिक विश्वसनीय होगा।


किन्हें मिली है छूट?

हालांकि कुछ श्रेणियों को इस नियम से छूट दी गई है। किराये के मकानों में रहने वाले लोग और प्रवासी मजदूर, जो अपने कार्यस्थल पर रह रहे हैं, वे ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए भारत सरकार के आधिकारिक जनगणना पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जहां कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे।


पटना में व्यापक स्तर पर तैयारी

राजधानी पटना में जनगणना को लेकर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर तैयारी की है। जिले को कुल 46 चार्ज क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहां हजारों की संख्या में जनगणनाकर्मी और पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को भी जागरूकता अभियान में शामिल किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग लें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं।


गोपनीयता का पूरा आश्वासन

जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान ली जाने वाली सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। इनका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का दस्तावेज नहीं लिया जाएगा, जिससे आम लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।


विकास की नींव है जनगणना डेटा

अधिकारियों के अनुसार, जनगणना सिर्फ जनसंख्या की गिनती तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह देश के विकास की आधारशिला है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का निर्माण इन्हीं आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सही और सटीक जानकारी प्रदान करे।


कुल मिलाकर, जनगणना 2027 बिहार में एक बड़े और सुव्यवस्थित अभियान के रूप में सामने आ रही है। हालांकि नए नियमों ने कुछ वर्गों के लिए सीमाएं तय की हैं, लेकिन इसका उद्देश्य डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है, ताकि भविष्य की नीतियां अधिक प्रभावी और जनहितकारी बन सकें।