पटना: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) में अब नए अध्यक्ष के नेतृत्व में परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। पटना प्रमंडल के आयुक्त और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2001 बैच के अधिकारी राजेश कुमार ने शुक्रवार को बिहार बोर्ड के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण कर लिया। कुर्सी संभालते ही उन्होंने साफ कर दिया कि परीक्षा संचालन में लापरवाही, अनियमितता और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही बोर्ड ने परीक्षार्थियों और अभ्यर्थियों से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए हैं।
इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा की तारीख और मैट्रिक-इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 के लिए आवेदन से वंचित रह गए विद्यार्थियों को एक और मौका देना है। ऐसे में बोर्ड के नए अध्यक्ष की पहली समीक्षा बैठक को विद्यार्थियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
22 नवंबर को होगी लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा
बिहार बोर्ड की समीक्षा बैठक में विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा की तैयारियों पर विशेष चर्चा हुई। बैठक में इस परीक्षा को 22 नवंबर 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, परीक्षा की तारीख, परीक्षा केंद्र और एडमिट कार्ड को लेकर अभ्यर्थियों को बोर्ड की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।
आमतौर पर परीक्षा की तारीख से लगभग पांच दिन पहले एडमिट कार्ड जारी किए जाने की संभावना रहती है। ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय बोर्ड की आधिकारिक घोषणा को ही अंतिम मानें।
मैट्रिक-इंटर 2027 के विद्यार्थियों को मिला आखिरी मौका
बिहार बोर्ड ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को भी बड़ी राहत दी है। जिन छात्रों का किसी कारणवश निर्धारित समय में परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाया था, उन्हें अब एक और अवसर दिया गया है।बोर्ड के फैसले के मुताबिक, ऐसे विद्यार्थी 7 नवंबर से 17 नवंबर 2026 तक परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं। यानी आवेदन से छूट गए विद्यार्थियों के पास अब अपनी गलती सुधारने और परीक्षा में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी करने का मौका है।
विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपने विद्यालय के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद दोबारा मौका मिलेगा या नहीं, इसे लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है।
एक महीने में दुरुस्त होगी परीक्षा व्यवस्था
अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद राजेश कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर बोर्ड के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि अगले एक महीने के भीतर परीक्षा संचालन से जुड़ी सभी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए।
उन्होंने पूर्व में आयोजित परीक्षाओं के दौरान सामने आई गड़बड़ियों और अनियमितताओं की भी समीक्षा करने को कहा। इसके साथ ही जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण परीक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है, उन्हें चिह्नित कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अध्यक्ष ने बोर्ड में लंबित सभी मामलों का भी एक महीने के भीतर निष्पादन करने पर जोर दिया। उनका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है।
कोर्ट में लंबित मुकदमों पर भी रहेगी नजर
बिहार बोर्ड के प्रशासनिक कामकाज को गति देने के लिए न्यायालयों में लंबित मुकदमों और एमजेसी (अवमानना याचिका) से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को इन मामलों के जल्द निष्पादन के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा परीक्षा संचालन और दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए चयनित एजेंसियों की विश्वसनीयता भी जांची जाएगी। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि संबंधित एजेंसियों से एनओसी ली जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें किसी विभाग या संस्था ने ब्लैकलिस्ट नहीं किया है।
नए अध्यक्ष के सामने कई बड़ी चुनौतियां
राजेश कुमार के सामने बिहार बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की चुनौती होगी। हर साल लाखों विद्यार्थी मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा फॉर्म से लेकर एडमिट कार्ड जारी करने, परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन और परिणाम घोषित करने तक पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना जरूरी है।
पहली समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों से संकेत मिल रहे हैं कि नए अध्यक्ष की प्राथमिकता केवल परीक्षाएं आयोजित कराना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर करना भी है। अब देखना होगा कि अगले एक महीने में बोर्ड के कामकाज में कितना बदलाव दिखाई देता है।





