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दाखिल-खारिज कराने के लिए जिंदा हुई 9 साल पहले मृत हो चुकी महिला! बिहार में सामने आया चौंकाने वाला मामला, क्या करेंगे विजय सिन्हा?

Bihar Bhumi: भागलपुर में 2015 में मृत महिला को 2024 में कागज़ों पर ज़िंदा दिखाकर जमीन का नामांतरण कराया गया, फर्जी शपथपत्र और अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने लापरवाहों पर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया।

Bihar Bhumi
दाखिल-खारिज में भारी फर्जीवाड़ा
© Reporter
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन के मामलों में भारी फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने बड़ी मुहिम छेड़ दी है। राज्यभर में जमीन के विवाद मामलों को सुलझाने का काम शुरू हो चुका है। इस दौरान लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन भी हो रहा है। अब इसी बीच भागलपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है।


दरअसल, भागलपुर जिले से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी रिकॉर्ड, राजस्व व्यवस्था और ज़मीन नामांतरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2015 में मृत्यु हो चुकी एक महिला को वर्ष 2024 में कागज़ों पर ज़िंदा दिखाकर उसकी ज़मीन का नामांतरण कर दिया गया। इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार की दोहरी कहानी बताया जा रहा है, जिसमें फर्जी दस्तावेज़, झूठा शपथपत्र और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है।


मामला भागलपुर सदर अंचल क्षेत्र का है। मृत महिला का नाम बेबी शेख उर्फ रुखसार निशा था, जिनकी मृत्यु 6 अप्रैल 2015 को हो चुकी थी। नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र रिकॉर्ड में मौजूद है। इसके बावजूद, वर्ष 2024 में राजस्व अभिलेखों में उन्हें जीवित दिखाते हुए उनकी जमीन का नामांतरण किया गया। यह नामांतरण एक फर्जी शपथपत्र के आधार पर किया गया था, जिसे देखकर प्रशासन भी हैरान रह गया।


बताया जा रहा है कि मृतका के पति स्वर्गीय मो. शर्फुद्दीन की भी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। जमीन के वास्तविक मालिक के निधन के बाद नियम के अनुसार उत्तराधिकारियों के नाम पर नामांतरण होना चाहिए था। लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर एक सुनियोजित साजिश के तहत फर्जीवाड़ा किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि किसी अन्य व्यक्ति के नाम से शपथपत्र तैयार कर जमीन को अवैध रूप से अपने नाम कराने की कोशिश की गई।


इस पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब जमीन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और मामले की जांच-पड़ताल शुरू हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीएम विकास कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने जगदीशपुर अंचल और संबंधित थाना प्रभारी को पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। 


एसडीएम ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर जांच में राजस्व कर्मियों या अन्य अधिकारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी। जांच में यह आशंका भी गहराई है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी नामांतरण मामलों की भी जांच कराई जाए, ताकि ऐसे अन्य फर्जी मामलों का भी खुलासा हो सके।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता