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Bihar Assembly : सदन में अपने ही विधायक ने खोली विभाग की पोल! ग्रामीण पुल निर्माण में देरी पर मंत्री से पूछा- डिजाइन बनाने वाले इंजीनियर सक्षम हैं या नहीं?

बिहार विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान जदयू विधायक जितेंद्र कुमार ने अपने क्षेत्र में लंबित पुल निर्माण का मुद्दा उठाया। विधायक ने कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति, टेंडर और संवेदक चयन के बाद भी दो साल से काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण का

Bihar Assembly : सदन में अपने ही विधायक ने खोली विभाग की पोल! ग्रामीण  पुल निर्माण में देरी पर मंत्री से पूछा- डिजाइन बनाने वाले इंजीनियर सक्षम हैं या नहीं?
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Bihar Assembly :  बिहार विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन प्रश्नोत्तर काल के दौरान सत्ता पक्ष के ही विधायक ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। जदयू विधायक जितेंद्र कुमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से लंबित ग्रामीण पुल निर्माण का मामला उठाते हुए ग्रामीण कार्य विभाग को कटघरे में खड़ा किया। विधायक ने कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति, टेंडर और संवेदक चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद दो साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

विधायक जितेंद्र कुमार ने प्रश्नकाल के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े मामले को उठाते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के कतरी सराय प्रखंड अंतर्गत तरौली गांव में मुंशी नदी पर बनने वाले विश्वस्तरीय पुल को लेकर वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद पुल निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी हो गई और संवेदक का चयन भी कर लिया गया। लेकिन इसके बावजूद जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका है।

उन्होंने सदन में सवाल किया कि जब पुल निर्माण की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं तो आखिर दो साल बाद भी काम क्यों लंबित है। विधायक ने सरकार से जानना चाहा कि आखिर इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य कब से शुरू किया जाएगा।

मंत्री ने बताया डिजाइन में कमी के कारण रुका निर्माण

विधायक के सवाल का जवाब देते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने खुद समीक्षा की है। मंत्री ने बताया कि यह सड़क पुल करीब 19.04 किलोमीटर लंबा है और इसके डिजाइन में कुछ तकनीकी कमियां सामने आई हैं। इसी वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाते हुए कहा कि डिजाइन में सुधार की प्रक्रिया चल रही है और आने वाले लगभग दो महीने के अंदर पुल निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

विधायक ने उठाया तकनीकी जांच में देरी का मुद्दा

मंत्री के जवाब के बाद विधायक जितेंद्र कुमार फिर अपनी सीट से खड़े हुए और पूरक सवाल करते हुए कहा कि पुल की डिजाइन को लेकर पहले ही तकनीकी सलाहकार को फरवरी 2025 में पत्र लिखा गया था। उन्होंने कहा कि राज्य में सैकड़ों पुलों की डिजाइन जांच के लिए भेजी गई है, लेकिन पिछले एक साल से कई मामलों में रिपोर्ट नहीं आई है।

विधायक ने सवाल किया कि आखिर पुल की डिजाइन की जांच कब तक पूरी होगी और रिपोर्ट कब उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक डिजाइन को मंजूरी नहीं मिलेगी, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकता है। ऐसे में देरी का खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

मंत्री बोले- पुलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए बनाया गया है सेल

इसके जवाब में ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि पहले बनाए गए कई ग्रामीण पुलों में तकनीकी खामियां सामने आई हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने पुलों के डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक अलग सेल का गठन किया है।

मंत्री ने कहा कि इस सेल में विशेषज्ञ और सक्षम अधिकारी शामिल हैं, जो पुलों की डिजाइन की जांच कर रहे हैं। उन्होंने विधायक को आश्वासन दिया कि इस मामले में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी और एक से डेढ़ महीने के अंदर डिजाइन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

विधायक ने इंजीनियरों की क्षमता पर उठाए सवाल

मंत्री के जवाब के बाद विधायक जितेंद्र कुमार ने फिर सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि जब खुद मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि पुल का डिजाइन सही नहीं था, तो सवाल उठता है कि आखिर डिजाइन तैयार करने वाले इंजीनियरों की क्षमता पर क्या सवाल नहीं उठता?

उन्होंने कहा कि अगर इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए डिजाइन में बार-बार कमी सामने आ रही है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। विधायक ने सदन में मांग की कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर तकनीकी स्तर पर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

पुल निर्माण में देरी को लेकर सदन में गरमाया मामला

विधानसभा में हुए इस सवाल-जवाब के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा ही विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से मामला चर्चा में आ गया। विधायक ने जहां क्षेत्र की जनता की समस्या को प्रमुखता से उठाया, वहीं मंत्री ने जल्द निर्माण शुरू कराने का भरोसा दिया।

अब देखने वाली बात होगी कि विभाग तय समय सीमा के अंदर डिजाइन की समस्या दूर कर पुल निर्माण शुरू करा पाता है या नहीं। स्थानीय लोगों को भी लंबे समय से इस पुल के निर्माण का इंतजार है, क्योंकि इसके बनने से क्षेत्र में आवागमन आसान होने के साथ-साथ विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।