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सिविल सर्जन से मारपीट के विरोध में पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों में OPD बाधित, गोपालगंज और रोहतास में मरीजों की बढ़ी परेशानी

Bihar News: अरवल में सिविल सर्जन के साथ मारपीट की घटना के विरोध में बिहार के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने सांकेतिक रूप से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। गोपालगंज, रोहतास समेत कई जिलों में ओपीडी, सेवाएं प्रभावित रहीं, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं।

Bihar News
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar News: बिहार के अरवल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में गोपालगंज समेत पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने सोमवार को ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। कार्य बहिष्कार के कारण सदर अस्पताल सहित जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था प्रभावित रही और मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। चिकित्सकों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की गिरफ्तारी और अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।



गोपालगंज के सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों ने एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान ओपीडी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं, जबकि इमरजेंसी सेवाएं पूर्व की तरह जारी रखी गईं ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बड़ी संख्या में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बिना ओपीडी सेवा के वापस लौटना पड़ा या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।



बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के जिला अध्यक्ष डॉ. कैप्टेन एस.के. झा ने कहा कि यह केवल ओपीडी का एक सूत्री सांकेतिक बहिष्कार है, जिसे पूरे राज्य में सरकारी चिकित्सकों द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि अरवल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आरोप है कि कुछ लोगों ने भीड़ जुटाकर सिविल सर्जन के साथ मारपीट की, जिसके बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।



डॉ. एस.के. झा ने कहा कि चिकित्सक लंबे समय से अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिले के सर्वोच्च चिकित्सा पदाधिकारी यानी सिविल सर्जन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो सामान्य चिकित्सकों की सुरक्षा की क्या गारंटी है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों पर गंभीर मरीजों का इलाज करने का दबाव रहता है, लेकिन यदि किसी मरीज की स्थिति बिगड़ जाए या किसी कारणवश अप्रिय घटना हो जाए, तो डॉक्टरों पर हमला कर दिया जाता है। ऐसे भय के माहौल में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा देना संभव नहीं है।



चिकित्सकों ने राज्य सरकार से अस्पतालों में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा डॉक्टरों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि डॉक्टर खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे तो स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा और इसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ेगा।



उधर, सासाराम में भी विभिन्न सरकारी अस्पतालों में आज ओपीडी सेवा ठप रखा गया है। अरवल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद सासाराम में भी ओपीडी सेवा पूरी तरह से ठप है। सुबह से ही कोई डॉक्टर इलाज के लिए नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में वैसे मैरिज जिन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, वह अस्पताल में पहुंचकर भटक रहे हैं। ओपीडी में सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, जांच एवं फिजियोथैरेपी सेवा भी बंद है। अरवल की घटना से आक्रोशित स्वास्थ्य कर्मियों का यह हड़ताल है। इन लोगों का कहना है कि जब तक दोषी पर कार्रवाई नहीं होती है, राज्यव्यापी यह अभियान चलता रहेगा। सासाराम के ओपीडी में आप सन्नाटा देख रहे हैं। जबकि अस्पताल में आम दिनों में काफी भीड़ होती है। डॉक्टर का चैंबर खाली है, ऐसे में दूर-दराज से आए मरीज अधिक परेशान दिखाई दे रहे हैं।

गोपालगंज से नमो नारायण मिश्रा और रोहतास से रंजन कुमार की रिपोर्ट...

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता