1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Aug 08, 2025, 12:48:07 PM
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Bihar Transport: भ्रष्टाचार को लेकर परिवहन विभाग हमेशा चर्चा में रहता है. इस बार सरकारी कर्मियों ने ही सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया. आमलोगों से वसूली करते-करते परिवहन विभाग के कर्मी सरकारी खजाने को ही साफ करने में जुट गए. हालांकि मामला पकड़ा गया है और आरोपी परिवहन कर्मियों के खिलाफ थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया है. रोहतास परिवहन कार्यालय द्वारा टैक्स के रूप में वसूले गए 2 करोड़ 30 लाख रू का गबन किया गया है. इस खुलासे के बाद दूसरे जिले के डीटीओ कार्यालय में भी इस तरह के घोटाले से इनकार नहीं किया जा सकता है. जिन कर्मियों पर गबन का आरोप है, वे भोजपुर डीटीओ कार्यालय में भी काम कर चुके हैं. लिहाजा यहां भी टैक्स की राशि का घोटाला हो सकता है. इस आधार पर भोजपुर जिला परिवहन कार्यालय में भी हिसाब-किताब का मिलान किया जा रहा है.
भोजपुर डीटीओ ने क्या कहा....
भोजपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी मोइज जिया ने बताया कि हमलोग मिलान करा रहे हैं. बैंक से भी जानकारी मांगी गई है. रोहतास परिवहन कार्यालय में हुए गबन मामले में डाटा इंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह पर केस किया गया है. ऑपरेटर अजय सिंह का भोजपुर डीटीओ कार्यालय में 2 महीने का कार्य अवधि रहा है. इस अवधि का मिलान किया जा रहा है. अगर गड़बड़ी सामने आयेगी तो कार्रवाई निश्चित है.
4 अगस्त को रोहतास डीटीओ ने नगर थाने में दर्ज कराया केस
रोहतास परिवहन कार्यालय में घोटाले के खुलासे के बाद रोहतास के जिला परिवहन पदाधिकारी रामबाबू ने 4 अगस्त को नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. परिवहन कार्यालय के चार कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ. सरकारी राजस्व राशि को सरकारी खाते में जमा नहीं कराए जाने का यह मामला है. थाना में दिए आवेदन में बताया गया है कि जिला परिवहन कार्यालय के RTPS काउंटर के द्वारा वाहन टैक्स (MV Tax) और इ-चालान के माध्यम से जमा हुई सरकारी राशि को सरकारी खाते में जमा करना था. इसके लिए जिन कर्मियों को नियुक्त किया गया था उन्होंने गंभीर लापरवाही और गड़बड़ी की. यह प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य लग रहा है.
रोहतास डीटीओ आवेदन में जिक्र किया गया है कि जांच के दौरान तत्कालीन डाटा इंट्री ऑपरेटर और प्रोग्रामर भी मौजूद थे. तत्कालीन डाटा इंट्री ऑपरेटर अजय कुमार सिंह हैं. जो अभी आरा में परिवहन परिवहन कार्यालय में कार्यरत है. अजय कुमार सिंह ने अपनी गलती स्वीकार की है और 15 लाख 99 हजार 75 रुपए जमा किया है. शेष राशि जमा करने के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन तत्कालीन डाटा इंट्री ऑपरेटर और प्रोग्रामर ने 31 जुलाई 2025 तक उस राशि को सरकारी खाते में जमा नहीं की.