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मोबाइल-टीवी की आदत बन रही खामोश खतरा: अधूरी नींद से बढ़ रहा अस्थमा का जोखिम, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Health News: अस्थमा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। JLNMCH की स्टडी बताती है कि मोबाइल-टीवी की लत और अधूरी नींद अब गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह बनती जा रही है। आखिर क्या कहती है रिपोर्ट और किन लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा...

मोबाइल-टीवी की आदत बन रही खामोश खतरा: अधूरी नींद से बढ़ रहा अस्थमा का जोखिम, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
Ramakant kumar
3 मिनट

Health News: आज के दौर में देर रात तक मोबाइल और टीवी देखना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है, खासकर युवाओं और बच्चों के बीच। लेकिन अब यही आदत धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों की वजह बनती जा रही है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JLNMCH) में हुई एक बड़ी स्टडी ने इस खतरे को साफ तौर पर सामने ला दिया है।


बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में नींद से जुड़ी समस्याओं और सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा, किशोर और छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।


अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें नींद की समस्या के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी की शिकायत भी है।


स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

इस अध्ययन में जनवरी से जून 2026 के बीच कुल 6753 मरीजों की जांच की गई। जांच के दौरान मरीजों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया। रिपोर्ट में पाया गया कि करीब 63 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिन्हें स्लीप डिसऑर्डर के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी दोनों की समस्या थी।


यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि नींद की कमी अब केवल एक सामान्य परेशानी नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।


क्यों खतरनाक है अधूरी नींद

विशेषज्ञों का कहना है कि जब व्यक्ति पूरी नींद नहीं लेता, तो शरीर के अंदर सूजन बढ़ाने वाले तत्व सक्रिय हो जाते हैं। ये तत्व धीरे-धीरे फेफड़ों को प्रभावित करते हैं और सांस से जुड़ी बीमारियों को जन्म देते हैं। मोबाइल और टीवी के ज्यादा इस्तेमाल से लोगों का सोने-जागने का समय पूरी तरह बिगड़ जाता है। देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है और शरीर का प्राकृतिक संतुलन टूट जाता है।


बच्चों और युवाओं पर सबसे ज्यादा असर

डॉक्टरों का मानना है कि इस समस्या का सबसे ज्यादा असर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही खराब दिनचर्या और स्क्रीन की लत उन्हें बीमार बना रही है। अगर समय रहते इस आदत को नहीं बदला गया, तो आने वाले समय में अस्थमा और एलर्जी के मामलों में और तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग अपनी दिनचर्या को संतुलित करें और समय पर सोने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। यह स्टडी एक साफ चेतावनी है कि आधुनिक जीवनशैली की लापरवाही भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। अब जरूरी है कि लोग समय रहते सतर्क हो जाएं और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें।