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BIHAR NEWS : “शराब पकड़ने निकली गाड़ी में ही शराब!”नशे में ड्राइवर का सड़क पर हंगामा,महिलाओं से की बदसलूकी; 500 मीटर दूर थाना रहा बेखबर

शराबबंदी के दावों के बीच बड़ा खुलासा! भागलपुर में उत्पाद विभाग की गाड़ी से ही शराब बरामद, ड्राइवर नशे में महिलाओं से बदसलूकी करता रहा और पुलिस 500 मीटर दूर खामोश रही।

BIHAR NEWS : “शराब पकड़ने निकली गाड़ी में ही शराब!”नशे में ड्राइवर का सड़क पर हंगामा,महिलाओं से की बदसलूकी; 500 मीटर दूर थाना रहा बेखबर
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

BIHAR NEWS : भागलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी की जमीनी हकीकत को आईना दिखाती है। कागजों पर सख्ती और हकीकत में ढिलाई—इसका जीता-जागता उदाहरण नाथनगर थाना क्षेत्र के मदनीनगर चौक के पास शुक्रवार देर रात देखने को मिला।


बताया जाता है कि उत्पाद विभाग (मद्य निषेध) की रेड-ब्लू लाइट लगी सरकारी गाड़ी का चालक खुद ही ‘नशे में चूर’ होकर सड़क पर तमाशा कर रहा था। जी हां, वही विभाग जो शराबबंदी लागू कराने के लिए जिम्मेदार है, उसकी गाड़ी से शराब बरामद हुई—अब इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है?


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गाड़ी पर साफ लिखा था—“अधीक्षक मद्य निषेध ग्रुप सेंटर 3 भागलपुर।” यानी पहचान भी पूरी, और करतूत भी खुली किताब की तरह सामने। चालक ने ट्रैफिक सिग्नल के पास गाड़ी रोकी और नशे में धुत होकर शादी समारोह में आई महिलाओं पर फब्तियां कसने लगा। विरोध करने पर माफी मांगने के बजाय उसने ‘सरकारी रौब’ दिखाना शुरू कर दिया। जब स्थानीय युवाओं ने उसे मदनीनगर गोलंबर के पास घेरा, तो साहब ने खुद को एक्साइज अधिकारी बताते हुए धमकी दी—“दो मिनट में सबको फंसा दूंगा।” यानी कानून तोड़ने वाला खुद कानून का ठेकेदार बन बैठा!


अब जरा इस कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ सुनिए—जब लोगों ने गाड़ी की तलाशी ली, तो गियर के पास से अंग्रेजी शराब की बोतल बरामद हुई। मतलब साफ है—शराबबंदी लागू कराने वाली गाड़ी खुद ‘चलती-फिरती बार’ बनी हुई थी।


इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने 112 डायल कर पुलिस को सूचना दी। लेकिन पुलिस का रवैया भी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं रहा—फोन गया, सूचना दी गई, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। और ये सब तब हुआ जब घटनास्थल से महज 500 मीटर की दूरी पर नाथनगर थाना मौजूद है। अब सवाल उठता है—क्या पुलिस को रास्ता नहीं मिला? या फिर इतनी नजदीकी दूरी भी ‘बहुत दूर’ लगने लगी? या फिर मामला सरकारी विभाग से जुड़ा था, इसलिए ‘देखो और चुप रहो’ वाली नीति अपनाई गई?


स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर पहुंचती, तो आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार किया जा सकता था। लेकिन यहां तो हाल ये रहा कि आम लोग ही कानून व्यवस्था संभालते नजर आए, और जिम्मेदार महकमे ‘मौन दर्शक’ बने रहे।


इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह एक सरकारी गाड़ी का चालक नशे में हंगामा कर रहा है और लोगों को धमका रहा है। यह वीडियो प्रशासन की ‘चौकसी’ पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब जरा सोचिए—जब शराबबंदी लागू कराने वाले ही शराब लेकर घूमेंगे, जब सरकारी ड्राइवर ही नशे में महिलाओं से बदसलूकी करेंगे, और जब पुलिस 500 मीटर दूर होकर भी नहीं पहुंचेगी—तो आम जनता किस पर भरोसा करे?


बिहार में शराबबंदी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन भागलपुर की यह घटना बताती है कि जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। यहां कानून का डर नहीं, बल्कि ‘कानून के नाम पर डराने’ का खेल चल रहा है।कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक ड्राइवर की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलने वाला है—जहां नियम किताबों में सख्त हैं, लेकिन सड़क पर सब ‘सेटिंग’ से चलता है।