Bihar Politics: बेगूसराय के मटिहानी के आरजेडी विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह को करीब 12 साल पुराने एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। जिला जज द्वितीय सह एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने मुफस्सिल थाना कांड संख्या 98/2014 की सुनवाई पूरी करने के बाद विधायक को साक्ष्य के अभाव में बरी कर कर दिया। इस फैसले के साथ ही वर्ष 2014 से चले आ रहे इस मामले में विधायक को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल, मामला 19 मार्च 2014 का है। अभियोजन के अनुसार सिंघौल थाना क्षेत्र में तौजी नंबर 2802, खाता नंबर 164 की जमीन पर चारदीवारी निर्माण को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। आरोप था कि नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह अपने समर्थकों के साथ उक्त जमीन पर जबरन चारदीवारी निर्माण करा रहे थे। इसका विरोध कांग्रेस यादव और उनके समर्थकों द्वारा किया जा रहा था। निर्माण को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। आरोप के मुताबिक, इसी दौरान दोनों पक्षों की ओर से सिंघौल थानाध्यक्ष एवं पुलिस बल पर हिंसक हमला कर दिया गया। इस घटना में होमगार्ड जवान अनिरुद्ध यादव गंभीर रूप से घायल हो गया था। मामले को लेकर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में यह मामला अदालत तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने कुल छह गवाहों की गवाही कराई।
अभियोजन की ओर से तत्कालीन सदर अंचलाधिकारी सह सूचक निरंजन कुमार, सिंघौल थानाध्यक्ष राघवेंद्र कुमार, अनुसंधानकर्ता ललित कुमार, चिकित्सक डॉ. गोपाल मिश्रा, होमगार्ड जवान अनिरुद्ध यादव और चौकीदार जवाहर पासवान की गवाही कराई गई। मामले की सुनवाई में सबसे अहम बात यह रही कि अभियोजन पक्ष के इन गवाहों में से किसी ने भी हिंसा के दौरान विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह के घटनास्थल पर मौजूद होने की बात नहीं कही। गवाहों के अनुसार जिस समय दोनों पक्षों के बीच हिंसा हुई और पुलिस बल पर हमला हुआ, उस दौरान विधायक मौके पर उपस्थित नहीं थे।
अदालत में प्रस्तुत गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया।
कोर्ट के इस फैसले से मटिहानी विधायक को पुराने मामले में बड़ी राहत मिली है। खास बात यह रही कि जिस घटना में पुलिस बल पर हिंसक हमले और एक होमगार्ड जवान के गंभीर रूप से घायल होने का आरोप था, उसी मामले में सुनवाई के दौरान विधायक की घटनास्थल पर मौजूदगी अभियोजन के गवाहों से प्रमाणित नहीं हो सकी। फैसले के बाद वर्ष 2014 से चले आ रहे इस मामले पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विराम लगा है और बोगो सिंह को अदालत से बड़ी राहत मिली है।





