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बेगूसराय में स्कूल के RO प्लांट में करंट लगने से पहली कक्षा के छात्र की मौत, DEO ने दिए जांच के आदेश

बेगूसराय के उत्क्रमित मध्य विद्यालय लौछे में RO प्लांट से पानी पीने पहुंचे 7 वर्षीय जयश कुमार की करंट लगने से मौत हो गई। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। DEO ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

बिहार न्यूज
सरकारी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
6 मिनट

BEGUSARAI: बेगूसराय जिले के एक सरकारी विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली दर्दनाक घटना सामने आई है। स्कूल परिसर में लगे आरओ प्लांट से पानी पीने पहुंचे सात वर्षीय मासूम छात्र की करंट लगने से मौत हो गई। घटना बखरी थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय लौछे की है। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों के प्रति उनका गुस्सा भी फूट पड़ा है।


मृतक की पहचान डंडारी थाना क्षेत्र के मोहब्बा कल्याणपुर गांव निवासी बिरजू पासवान के सात वर्षीय पुत्र जयश कुमार के रूप में हुई है। जयश अपने ननिहाल लौछे गांव में नाना मनोज पासवान के यहां रहकर पढ़ाई करता था। सोमवार को भी वह अपने रिश्तेदार बच्चों के साथ उत्क्रमित मध्य विद्यालय लौछे पहुंचा था। बताया जाता है कि उसका ननिहाल विद्यालय के समीप ही है और वह अक्सर अन्य बच्चों के साथ स्कूल जाता था।


पानी पीने पहुंचा था मासूम, आरओ प्लांट के पास लगा करंट

जानकारी के अनुसार, सोमवार करीब तीन बजे जयश स्कूल परिसर में लगे आरओ प्लांट पर पानी पीने पहुंचा। इसी दौरान वह बिजली के करंट की चपेट में आ गया और बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा। आरोप है कि काफी देर तक किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। बाद में एक बच्चे ने उसे बेहोशी की हालत में देखा और इसकी जानकारी शिक्षकों को दी।


इसके बाद शिक्षक आनन-फानन में उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले गए। वहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर कर दिया गया। हालांकि, सदर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।


मासूम की मौत से परिवार में कोहराम, अधूरे रह गए भविष्य के सपने

सात वर्षीय जयश की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिवार के लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहीं, इस दर्दनाक हादसे को लेकर विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों के प्रति परिजनों में भारी आक्रोश है।


जिस उम्र में जयश ने शिक्षा की दुनिया में कदम रखा था और अपने सुनहरे भविष्य के सपने संजोने शुरू किए थे, उसी उम्र में एक दर्दनाक हादसे ने उसकी जिंदगी छीन ली। अभी तो उसने स्कूल जाना और किताबों से दोस्ती करना शुरू ही किया था, लेकिन आरओ प्लांट में करंट की चपेट में आने से उसकी जिंदगी का सफर हमेशा के लिए थम गया। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इस हादसे ने उन सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया।


परिजनों का आरोप है कि स्कूल परिसर में आरओ प्लांट के पास बिजली के करंट का खतरा बना हुआ था, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। उनका कहना है कि हादसे के बाद भी मासूम काफी देर तक बेहोशी की हालत में पड़ा रहा। यदि समय रहते उस पर नजर पड़ती और तत्काल समुचित उपचार मिलता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।


डीईओ बोले- आरओ प्लांट बंद था, बिजली का तार कटा होने की आशंका; जांच के आदेश

मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि घटना उत्क्रमित मध्य विद्यालय लौछे की है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चा स्कूल परिसर में लगे आरओ प्लांट पर पानी पीने गया था। उस समय आरओ प्लांट बंद था। आशंका है कि वहां बिजली का तार कटा हुआ था, जिसके कारण बच्चा करंट की चपेट में आ गया।


डीईओ ने बताया कि मृतक बच्चा इस विद्यालय में नामांकित नहीं था। उसका ननिहाल स्कूल के पास है और वह वहीं रहकर अन्य बच्चों के साथ विद्यालय आता था। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। साथ ही शिक्षकों और प्रधानाध्यापक को विद्यालय परिसर में किसी भी तरह की समस्या या सुरक्षा संबंधी खामी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल दूर करने की हिदायत देने की बात कही।


पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी समस्या, फिर क्यों नहीं सुधरी व्यवस्था?

इस दर्दनाक हादसे ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय परिसर में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में यदि वहां लगे पेयजल संयंत्र में ही बिजली के करंट का खतरा बना रहे तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?


डीईओ ने भी बताया कि इससे पहले एक घटना के बाद शिक्षकों को सतर्क किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पहले भी सुरक्षा संबंधी समस्याएं सामने आ चुकी थीं, तो उन्हें दूर करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? स्कूल परिसर में बिजली की व्यवस्था की नियमित जांच क्यों नहीं हुई?


फिलहाल पूरे मामले की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन एक मासूम की मौत ने शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।  एक मासूम की जिंदगी चली गई, अब देखना होगा कि जांच में लापरवाही किसकी सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

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रिपोर्टर

HARERAM DAS

FirstBihar संवाददाता