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नहीं खत्म होगी अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता! जेडीयू नेतृत्व ने कर दी है बड़ी गलती, अब नीतीश कुमार को सामने आना होगा

अनंत सिंह की विधायकी पर संकट के बीच जेडीयू की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने का आदेश जारी किया और विधानसभा सदस्यता खत्म करने की अनुशंसा की।

बिहार न्यूज
अनंत सिंह को मिल सकता है फायदा
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
6 मिनट

PATNA: विधान परिषद चुनाव में पार्टी कैंडिडेट का विरोध करने के आरोप में जेडीयू ने अनंत सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. जेडीयू ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता यानि विधायकी खत्म करने की भी मांग की है. लेकिन अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई के मामले में जेडीयू नेतृत्व ने बड़ी भूल कर दी है. इसका फायदा अनंत सिंह को मिल सकता है. हालात ऐसे हैं कि अब नीतीश कुमार को सामने आना होगा. इसके अलावा जेडीयू के पास कोई रास्ता नहीं बचा है. 


समझिये मामला क्या है?

दरअसल, बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव हुए. इसमें पार्टी के विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नात्तक क्षेत्र से जेडीयू के कैंडिडेट नीरज कुमार का जमकर विरोध और जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का खुला समर्थन किया. 23 अक्टूबर को विधान परिषद चुनाव की वोटिंग होने के बाद जेडीयू का नेतृत्व एक्शन में आया. 


प्रदेश अध्यक्ष ने जारी किया अनंत सिंह को निकालने का आदेश

24 अक्टूबर को जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने अनंत सिंह को पार्टी से 6 सालों के लिए निकालने का आदेश जारी किया. उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह पर विधान परिषद चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार का विरोध करने, दूसरी पार्टी का प्रचार करने, जेडीयू के निर्देशों का उल्लंघन करने और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक बयानबाजी करने का आरोप लगाया. जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने ये भी ऐलान किया कि अनंत सिंह की विधायकी सदस्यता रद्द करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अनुशंसा की गई है. 


जेडीयू ने कर दी बड़ी गलती

लेकिन अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की हड़बड़ी में जेडीयू नेतृत्व ने बड़ी गलती कर दी है. दरअसल, भारत की किसी भी राजनीतिक पार्टी को तयशुदा कायदे कानून के तहत चलाना होता है. इसके लिए हर पार्टी अपना संविधान तैयार करती है और फिर उस संविधान को चुनाव आयोग को सौंपा जाता है. चुनाव आयोग को दिये गये संविधान के तहत ही किसी भी राजनीतिक दल का संचालन और कार्रवाई की जा सकती है. 


उमेश कुशवाहा को कार्रवाई का अधिकार नहीं

जेडीयू ने भी चुनाव आयोग को अपना विस्तृत संविधान सौंप रखा है. इसमें साफ साफ लिखा गया है कि पार्टी कैसे चलाई जायेगी. कैसे पार्टी के किसी नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई की जायेगी. जेडीयू के संविधान की धारा 19 में इस बात का विस्तृत उल्लेख है. इसमें साफ साफ लिखा है कि प्रदेश अध्यक्ष पार्टी के किसी विधायक को दल से बाहर नहीं कर सकते हैं. यानि उमेश सिंह कुशवाहा को विधायक अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार ही नहीं है.


नीतीश को आना होगा सामने

जेडीयू का संविधान कहता है कि पार्टी के अध्यक्ष को किसी भी नेता को दल से बाहर निकालने का अधिकार है. यानि नीतीश कुमार ही अनंत सिंह के खिलाफ किसी तरह का अनुशासनिक कार्रवाई कर सकते हैं. इसका मतलब साफ है कि अगर अनंत सिंह को जेडीयू से बाहर निकालना है को नीतीश कुमार को आदेश जारी करना होगा.


संजय झा को भी अधिकार नहीं

जेडीयू ने संजय झा को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बना रखा है. लेकिन पार्टी के संविधान में कार्यकारी अध्यक्ष के किसी अधिकार का जिक्र नहीं है. यानि संजय झा को भी अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार नहीं है.


अनंत सिंह को मिल सकता है फायदा

देश के किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए चुनाव आय़ोग में दिये गये अपने संविधान के मुताबिक ही चलना जरूरी है. लेकिन अनंत सिंह के मामले में जेडीयू ने अपने ही संविधान का पालन नहीं किया. पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने के लिए भी विधानसभा अध्यक्ष को लिखा है. विधानसभा अध्यक्ष भी किसी पार्टी के संबंध में फैसले के लिए चुनाव आयोग के निर्देशों का ही सहारा लेते हैं.


नीतीश को आना होगा सामने

ऐसे में अनंत सिंह अगर विधानसभा अध्यक्ष के सामने ये मामला उठाते हैं तो जेडीयू को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को आगे करना पड़ेगा. नीतीश कुमार के आदेश के बगैर ना तो अनंत सिंह के निष्कासन की कानूनी मान्यता मिल पायेगी और ना ही विधानसभा अध्यक्ष के लिए कोई आदेश पारित करना आसान होगा.


जेडीयू के आदेश में खामी का फायदा उठाने के लिए अनंत सिंह के लिए कोर्ट का रास्ता भी खुला है. वे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. इसके अलावा उनके पास एक इमोशनल कार्ड भी है. अनंत सिंह लगातार कह रहे हैं कि उन्होंने ऐसे वक्त में नीतीश कुमार का साथ दिया था, जब उनकी सरकार के गिरने का खतरा था.


अनंत सिंह 2024 के पाला बदल की चर्चा कर रहे हैं. जब नीतीश कुमार ने आरजेडी का दामन छोड़ कर बीजेपी से गठबंधन कर लिया था. उस दौरान अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी आरजेडी की विधायक थी. लेकिन अनंत सिंह की पत्नी ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर विधानसभा में नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन किया था. क्या नीतीश कुमार बुरे वक्त में साथ देने वाले के खिलाफ कार्रवाई के लिए आगे आयेंगे. ये देखना दिलचस्प होगा.

पटना से ब्यूरो रिपोर्ट