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60-40 नाय चलतौ : नियोजन नीति के विरोध में 10 अप्रैल को झारखंड बंद, विरोध जारी

RANCHI : झारखंड की नियोजन नीति के विरोध में 10 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। इसको लेकर आज यानी रविवार को मोरहाबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क में बैठक बुलायी गयी। &nbs

60-40 नाय चलतौ : नियोजन नीति के विरोध में 10 अप्रैल को झारखंड बंद, विरोध जारी
Tejpratap
Tejpratap
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RANCHI : झारखंड की नियोजन नीति के विरोध में 10 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है।  इसको लेकर आज यानी रविवार को मोरहाबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क में बैठक बुलायी गयी।  जिसके बाद अब यह निर्णय लिया गया है कि, झारखंड यूथ एसोसिएशन के तरफ से आगामी 10 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। झारखंड यूथ एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी सूरत में 60-40 की नीति नहीं चलेगी। नारा स्पष्ट है कि 60-40 नाय चलतौ। 


दरअसल, झारखंड यूथ एसोसिएशन का कहना है कि 60-40 वाली नियोजन नीति को वापस लिया जाए। खतियान आधारित नियोजन नीति बने। जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण रोस्टर जारी किया जाए। सभी विभागों में रिक्त पदों पर अविलंब नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाए। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन भी झारखंड यूथ एसोसिएशन के बैनर तले नियोजन नीति के विरोध में विधानसभा घेराव किया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी। पुलिस ने स्टूडेंट की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया था। आंसू गैस के गोले भी दागे थे।


वहीं, सरकार का तर्क है कि नई नियोजन नीति स्टूडेंट्स की राय पर लाई गई है। जबकि अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने उनकी चिंता और मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। हेमंत सोरेन सरकार की उदासीनता की वजह से आंदोलन तेज किया जाएगा। इसी सिलसिले में संताल परगना प्रमंडल के सभी 6 जिला मुख्यालयों में शुक्रवार को मशाल जुलूस निकाला जाएगा और 1 अप्रैल को संताल परगना बंद का आह्वान किया गया है। 


आपको बताते चलें कि, झारखंड में नियोजन नीति को लेकर जनवरी 2022 से ही लगातार उग्र आंदोलन जारी है। दरअसल, फरवरी 2020 में हेमंत सोरेन सरकार नई नियोजन नीति लाई थी। इसमें, राज्य की तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय नौकरियों में आवेदन के लिए झारखंड से ही 10वीं-12वीं पास करने की अनिवार्यता रखी गई थी। अभ्यर्थियों के लिए झारखंड की स्थानीय भाषा, संस्कृति एवं परिवेश की बुनियादी जानकारी रखना अनिवार्य किया गया था। क्षेत्रीय भाषा की सूची से हिंदी को हटाकर उर्दू भाषा को शामिल किया गया था। दिसंबर 2022 में झारखंड हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।