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10-Jul-2025 03:45 PM
By First Bihar
Sawan 2025: कालों के काल, महादेव शिव का प्रिय महीना सावन कल से आरंभ हो रहा है। यह माह शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, सावन मास को भगवान शिव की भक्ति का सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ शिव पूजन करते हैं।
पूजा की शुरुआत में भगवान शिव को जलधारा से स्नान कराना चाहिए, उसके बाद पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर) से अभिषेक करना उचित होता है। अभिषेक के पश्चात शिवलिंग पर बिल्वपत्र, भस्म, धतूरा, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करने चाहिए। पूजा के अंत में भगवान शिव के प्रिय मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। यह मंत्र शिवभक्ति का मूल है और मन, वाणी और आत्मा को शुद्ध करता है।
इस शुभ महीने में भगवान शिव के प्रमुख स्तोत्र और मंत्रों का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से “कर्पूरगौरं करुणावतारं...” स्तुति भगवान शिव की दिव्यता का वर्णन करती है। इस मंत्र में शिव को कर्पूर के समान उज्ज्वल, करुणा के सागर और भुजंगों की माला धारण करने वाले रूप में नमन किया गया है। यह मंत्र साधक के हृदय में शिव और पार्वती के वास की कामना करता है।
इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र, जिसे मृत्यु पर विजय देने वाला माना गया है, सावन मास में विशेष रूप से फलदायी होता है "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥" इस मंत्र का जाप रोग, भय, संकट और अकाल मृत्यु से रक्षा करता है तथा जीवन में शांति, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करता है।
सावन मास के प्रत्येक सोमवार को श्रावण सोमवारी व्रत रखा जाता है, जिसमें भक्त निर्जला या फलाहारी उपवास रखते हैं और दिनभर शिव नाम का स्मरण करते हैं। इस मास में कावड़ यात्रा, शिवपुराण का पाठ, और रुद्राभिषेक भी व्यापक रूप से किए जाते हैं। सावन का यह पावन महीना आत्मशुद्धि, भक्ति और शिव से एकात्मता का अवसर है। अगर श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव की आराधना की जाए, तो भगवान शिव निश्चय ही अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।