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Kharmas Sankranti: मीन संक्रांति और खरमास कब; जानें शुभ मुहूर्त और नियम

हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो मीन संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन सूर्य उपासना, स्नान, दान-पुण्य और जप-तप का विशेष महत्व होता है। साथ ही, इस दिन से खरमास की शुरुआत होती है।

28-Feb-2025 07:36 AM

By First Bihar

Kharmas Sankranti: संक्रांति तिथि को आत्मा के कारक सूर्य देव को समर्पित माना गया है। इस दिन विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा की जाती है, जिससे व्यक्ति को आरोग्य जीवन, समृद्धि और करियर में सफलता प्राप्त होती है। ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य उपासना को अत्यधिक महत्व दिया गया है। जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करता है, तब खरमास लगता है। इस दौरान सूर्य के प्रभाव से गुरु का प्रभाव क्षीण हो जाता है, जिसके कारण इस समय शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। इस वर्ष मार्च 2025 में सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे, जिससे मीन संक्रांति मनाई जाएगी और खरमास की शुरुआत होगी। आइए, इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं।


सूर्य गोचर 2025 (Sun Gochar 2025)

वर्तमान में सूर्य देव कुंभ राशि में स्थित हैं और 13 मार्च 2025 तक इसी राशि में रहेंगे। इसके बाद 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में गोचर करेंगे, जहां वे एक महीने तक रहेंगे। इसके बाद 14 अप्रैल 2025 को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे खरमास समाप्त हो जाएगा।


मीन संक्रांति 2025 (Meen Sankranti 2025) कब है?

मीन संक्रांति के दिन स्नान, दान, जप-तप और पूजा का विशेष महत्व होता है।

संक्रांति तिथि: 14 मार्च 2025

पुण्य काल: दोपहर 12:39 PM से 06:29 PM तक

महा पुण्य काल: शाम 04:29 PM से 06:29 PM तक

इस दौरान पवित्र नदी में स्नान, सूर्य अर्घ्य, दान-पुण्य और पूजा करना अत्यधिक लाभकारी माना जाता है।


खरमास कब से शुरू होगा? (Kharmas 2025 Date)

खरमास प्रारंभ: 14 मार्च 2025

खरमास समाप्त: 14 अप्रैल 2025

जैसे ही सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन से खरमास शुरू हो जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण आदि नहीं किए जाते हैं।


खरमास में क्या न करें? (Kharmas Ke Niyam)

विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों से बचें – इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में सफलता नहीं मिलती।

नकारात्मक विचारों से बचें – इस समय संयम और धैर्य रखना आवश्यक होता है।

गुरु और सूर्य देव की उपासना करें – इस दौरान धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और जप-तप पर ध्यान देना चाहिए।

दान-पुण्य करें – गरीबों को अन्न, वस्त्र और जरूरतमंदों को सहारा देना अत्यधिक शुभ माना जाता है।


खरमास में क्या करें?

सूर्य देव को जल अर्पित करें – प्रतिदिन ताम्र पात्र में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य दें।

गायत्री मंत्र और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें – इससे मनोबल और आत्मबल में वृद्धि होगी।

भगवान विष्णु और श्रीराम की पूजा करें – इस दौरान श्रीहरि की उपासना से विशेष लाभ मिलता है।

संतों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं – इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

मीन संक्राति 2025 के साथ ही 14 मार्च से खरमास की शुरुआत होगी, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान सभी प्रकार के शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है, लेकिन ध्यान, जप, तप, दान-पुण्य और भगवान की भक्ति करने से विशेष लाभ मिलता है। सूर्य देव की कृपा पाने के लिए नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य दें और धार्मिक कार्यों में संलग्न रहें।