BIHAR POLICE : थानेदार का फायरिंग का पुराना रिकॉर्ड, मुजफ्फरपुर के तीन थाना क्षेत्रों में कर चुका है फायरिंग; गायघाट गोलीकांड के बाद विवादों में SHO अजब प्रेम की गजब कहानी: जिगरी दोस्त की पत्नी पर आया युवक का दिल, पति ने करा दी शादी BIHAR NEWS : अचानक ब्रेक से ट्रकों की टक्कर, खलासी की मौत, चालक गंभीर Bihar Crime: चाय पी रहे युवक की पीट-पीटकर हत्या: बहन की शादी में शामिल होने आया था घर, परिजनों ने सड़क किया जाम Bihar News : सम्राट मॉडल कहने पर भड़का JDU, BJP को मिला करारा जवाब - तब तो कहिएगा की मदन सहनी मॉडल? बिहार में एक ही मॉडल वो है.... जमीन विवाद में भाइयों के बीच खूनी संघर्ष: एक की मौत, दो गंभीर रूप से घायल, आरोपी फरार Bihar News : जेल से निकलने को तैयार अनंत सिंह, बस एक कागज़ ने रोक दी रिहाई! जानिए कब बाहर आएंगे बाहुबली नेता और क्या है स्वागत की तैयारी Bihar News: नीतीश नहीं सम्राट मॉडल ! BJP की हुंकार-अगले तीन महीने में खत्म कर देंगे अपराध BIHAR NEWS : खाकी पर सवाल ! मुजफ्फरपुर कांड में SHO समेत 8 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, CID करेगी जांच Bihar News : तस्करों पर नहीं, एक-दूसरे पर टूट पड़ी खाकी! तस्करों के बजाय आपस में ही उलझ गई पुलिस, मद्य निषेध विभाग का सिपाही लहूलुहान
05-Jan-2025 07:00 AM
By First Bihar
Mahabharata: महाभारत का कुरुक्षेत्र युद्ध सिर्फ एक लड़ाई नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच का संग्राम था। इस युद्ध में कई अद्भुत और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हुईं। इन्हीं में से एक घटना पांडवों के मामा और मद्र नरेश शल्य से जुड़ी है। शल्य, जो पांडवों के मामा थे, कौरवों की सेना में शामिल हुए। यह निर्णय उन्होंने क्यों लिया और यह कैसे पांडवों के पक्ष में गया, यह एक अनोखी कहानी है।
कौन थे मद्र नरेश शल्य?
मद्र नरेश शल्य, राजा पांडु की दूसरी पत्नी माद्री के भाई थे। वे नकुल और सहदेव के सगे मामा और युधिष्ठिर, भीम व अर्जुन के भी मामा थे। युद्ध से पहले वे पांडवों से मिलने और उनके पक्ष का समर्थन करने के इरादे से हस्तिनापुर जा रहे थे।
दुर्योधन का छल
दुर्योधन ने शल्य के आगमन की खबर सुन ली थी। उसने शल्य और उनकी सेना के लिए पूरे रास्ते में बेहतरीन आवभगत की व्यवस्था कराई। खाने-पीने और ठहरने की उत्तम व्यवस्थाओं से प्रभावित होकर शल्य ने पूछा कि यह सब किसने किया है। दुर्योधन ने यह कहते हुए सामने आकर दावा किया कि यह सब उसकी व्यवस्था है।
शल्य, दुर्योधन की इस कृपा से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने उसे एक वचन दे दिया:
"जो तुम मांगोगे, वह मैं दूंगा।"
दुर्योधन की मांग और शल्य की शर्त
दुर्योधन ने चालाकी से मांग रखी कि शल्य कौरवों की सेना में शामिल होकर उसका संचालन करें। शल्य वचन दे चुके थे, इसलिए इनकार नहीं कर पाए। लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी:
"मैं तुम्हारे पक्ष में रहूंगा, लेकिन मेरी वाणी पर मेरा ही अधिकार रहेगा।"
दुर्योधन ने यह शर्त स्वीकार कर ली।
शल्य की वाणी बनी पांडवों का हथियार
युद्ध के दौरान शल्य को कर्ण का सारथी बनाया गया। हालांकि, अपनी शर्त के तहत, उन्होंने कौरवों की सेना का मनोबल तोड़ने का कार्य किया। वे युद्ध के दौरान कर्ण और अन्य योद्धाओं को पांडवों की वीरता का गुणगान सुनाते रहे।
कर्ण को निराश किया: अर्जुन की शक्ति और कौशल का बखान करते हुए शल्य ने कर्ण को लगातार हतोत्साहित किया।
कौरवों का मनोबल तोड़ा: शाम को युद्ध के बाद भी कौरवों की कमजोरियां गिनाकर उनका मनोबल गिराते थे।
परिणाम
युद्ध में शल्य ने दुर्योधन के पक्ष में रहते हुए भी अपनी वाणी से पांडवों की सहायता की। उनकी चतुराई और कूटनीति कौरवों के लिए घातक साबित हुई। इस प्रकार, पांडवों के मामा ने अप्रत्यक्ष रूप से अपने भांजों की विजय में योगदान दिया। महाभारत का यह अध्याय दिखाता है कि सत्य और धर्म की विजय में सहयोग कई रूपों में हो सकता है। शल्य, जिन्होंने दुर्योधन का साथ दिया, फिर भी पांडवों के प्रति अपनी निष्ठा निभाने में सफल रहे। यह कहानी महाभारत के जटिल लेकिन प्रेरणादायक पात्रों की गहराई को दर्शाती है।