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Bihar Assembly Speaker: प्रेम कुमार को मिली लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी, विधानसभा अध्यक्ष की क्या है भूमिका और अधिकार?

Bihar Assembly Speaker: विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। सदन की कार्यवाही, अनुशासन, विधायी प्रक्रिया और दलबदल विरोधी कानून से जुड़े मामलों में अध्यक्ष के पास व्यापक अधिकार होते हैं।

02-Dec-2025 12:33 PM

By FIRST BIHAR

Bihar Assembly Speaker: बिहार की गया सीट से 9वीं बार चुनाव जीतने के बाद डॉ. प्रेम कुमार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए हैं। विधानसभा में अध्यक्ष की भूमिका को लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। 


सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने से लेकर विधायी प्रक्रियाओं को दिशा देने तक, अध्यक्ष के पास कई महत्वपूर्ण अधिकार और जिम्मेदारंयां होती हैं। सदन में होने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण और लोकतांत्रिक मूल्यों के पालन को सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक भूमिकाओं में शामिल है।


अध्यक्ष यह तय करते हैं कि सदन में किस सदस्य को कब और कितने समय के लिए बोलने का अवसर दिया जाए। आवश्यक परिस्थितियों में वे सदन की कार्यवाही को स्थगित या निलंबित भी कर सकते हैं। अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारी मानी जाती है। अनुशासन भंग करने वाले सदस्यों के खिलाफ निलंबन या निष्कासन जैसी कार्रवाई का अधिकार भी अध्यक्ष के पास होता है।


दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत किसी विधायक की अयोग्यता से जुड़े मामलों का अंतिम निर्णय भी अध्यक्ष ही लेते हैं। इसके अलावा वे विभिन्न विधानसभा समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति करते हैं और उनके कामकाज की निगरानी करते हैं। कार्यमंत्रणा समिति, नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति जैसी महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता भी स्वयं विधानसभा अध्यक्ष करते हैं।


कानून निर्माण की प्रक्रिया में भी विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका अहम होती है। किसी विधेयक को धन विधेयक घोषित करने का अंतिम अधिकार उन्हीं के पास होता है। वे प्रस्तावों और संकल्पों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार भी रखते हैं। इस प्रकार, अध्यक्ष न केवल सदन के संचालन के केंद्र में होते हैं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुचारू और प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।