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22-Nov-2025 07:24 AM
By First Bihar
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में अभूतपूर्व फेरबदल देखने को मिला है। दो दशक से भी अधिक समय तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहने वाला गृह विभाग पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दे दिया गया है। शुक्रवार को मंत्रालयों के बंटवारे में मुख्यमंत्री ने यह विभाग अपने उपमुख्यमंत्री और BJP नेता सम्राट चौधरी को सौंप दिया। इसके बदले जेडीयू को वित्त और वाणिज्य कर जैसे अहम मंत्रालय मिले हैं, जो पहले BJP के पास थे। विधानसभा में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते BJP अब कानून-व्यवस्था की नीति में सीधे नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगी। यह विभागीय बदलाव सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति, स्थिरता और सत्ता-संतुलन पर गहरा असर डालने वाला है।
गृह विभाग मिलने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा-“मैं नीतीश कुमार द्वारा जमीन पर किए गए कार्यों को आगे बढ़ाऊंगा। यह मेरे लिए बड़ी जिम्मेदारी है और मैं सुशासन को और मजबूत करने का प्रयास करूंगा।” इस फैसले के साथ लगभग 20 साल में पहली बार बिहार में गृह मंत्रालय सहयोगी दल के नेता के पास रहेगा। हालांकि नीतीश ने सामान्य प्रशासन, विजिलेंस, कैबिनेट सचिवालय और निर्वाचन जैसे अपने पारंपरिक विभाग अपने पास ही रखे हैं।
2005 में सत्ता संभालने के बाद से नीतीश कुमार ने हर परिस्थिति में गृह विभाग को अपने नियंत्रण में रखा। चाहे गठबंधन बदला हो या सीटें घटी हों, उन्होंने इस मंत्रालय को कभी हाथ से नहीं जाने दिया। 2020 में जब जेडीयू 43 सीटों पर सिमट गई थी, तब भी उन्होंने गृह विभाग नहीं छोड़ा। महागठबंधन सरकार में RJD और कांग्रेस की मांगों के बावजूद भी यह विभाग उनके पास ही रहा।
तो फिर इस बार क्यों छोड़ना पड़ा गृह विभाग? यह रहे प्रमुख कारण
NDA में सत्ता संतुलन बदलने की मजबूरी
2025 चुनावों के बाद BJP स्पष्ट रूप से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। NDA की सरकार में स्थिरता बनाए रखने और BJP के बढ़े हुए जनादेश का सम्मान करने के लिए नीतीश को शक्ति-संतुलन का नया मॉडल अपनाना पड़ा। गृह विभाग देने से BJP को “रियल पावर शेयरिंग” का संदेश गया।
गठबंधन को टिकाऊ बनाने की रणनीति
नीतीश पिछले डेढ़ दशक में कई बार पाला बदलने की छवि से घिरे रहे हैं। इस बार BJP एक स्थायी साझेदारी चाहती थी और गृह विभाग उसके लिए ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांग बन गया था। इसे देकर नीतीश ने भरोसा बहाल करने और गठबंधन को स्थायित्व देने की कोशिश की।
उम्र, प्रशासनिक बोझ और ट्रांजिशन प्लान
नीतीश 73 वर्ष के हो चुके हैं। लगातार प्रशासनिक फोकस संभालना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। उनके करीबी मानते हैं कि अब वे शासन की जगह “मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन” पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। गृह विभाग की जिम्मेदारी BJP को देना उनके राजनीतिक ट्रांजिशन का हिस्सा माना जा रहा है।
बढ़ते अपराध पर आलोचना और दबाव
पिछले कार्यकाल में अपराध बढ़ने को लेकर सहयोगियों से आलोचना बढ़ी थी। चिराग पासवान समेत कई नेताओं ने ‘कानून-व्यवस्था की गिरावट’ को बड़ा मुद्दा बनाया। नीतीश की प्राथमिकता थी कि गृह विभाग का बोझ साझा हो और भाजपा अपने वादों को लागू करने की जिम्मेदारी खुद संभाले।
BJP के केंद्रीय दबाव और चुनावी एजेंडा
केंद्रीय नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सीमांचल में अवैध घुसपैठ, अपराध और पुलिस सुधार को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था। BJP चाहती थी कि अब इन्हें राज्य स्तर पर लागू करने के लिए उसके पास सीधा नियंत्रण हो। यही दबाव गृह विभाग हस्तांतरण का मुख्य कारण माना गया।
विभागों का बड़ा फेरबदल: कौन क्या संभालेगा?
JD(U) की झोली में आए अहम मंत्रालय
वित्त + वाणिज्य कर – बिजेंद्र प्रसाद यादव
एनर्जी और प्लानिंग & डेवलपमेंट – बिजेंद्र यादव के पास ही
सोशल वेलफेयर – मदन साहनी
एजुकेशन – सुनील कुमार (साथ में साइंस–टेक/टेक्निकल एजुकेशन)
रूरल डेवलपमेंट – श्रवण कुमार (अब ट्रांसपोर्ट भी)
माइनॉरिटी वेलफेयर – जमा खान
रूरल वर्क्स – अशोक चौधरी
फूड एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन – लेशी सिंह
दो मंत्री—महेश्वर हजारी और जयंती राज—कैबिनेट से बाहर। उनके विभाग अब विजय कुमार चौधरी संभालेंगे।
BJP की पकड़ और नए मंत्रालय
स्वास्थ्य + विधि विभाग – मंगल पांडे
नगर विकास व आवास + पथ निर्माण – नितिन नबीन
उद्योग – दिलीप जायसवाल
कृषि – रामकृपाल यादव
IT + खेल – श्रेयसी सिंह
पर्यटन/कला/संस्कृति – अरुण शंकर प्रसाद
दो पूर्व मंत्री—नीरज बाबू और कृष्णानंदन पासवान—को हटाया गया।
गृह विभाग पर BJP की पकड़ का मतलब है कि अब राज्य की सुरक्षा, पुलिस सुधार, खुफिया तंत्र और अपराध नियंत्रण में पार्टी की सीधी भूमिका होगी। चुनावी वादों—जैसे घुसपैठ रोकना, सीमांचल फोकस, अपराध नियंत्रण—को लागू करने का यह बड़ा मौका है। दूसरी ओर नीतीश अब प्रशासनिक माइक्रो-मैनेजमेंट से हटकर अपनी परंपरागत फाइलों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
गृह विभाग BJP को देकर नीतीश कुमार ने न केवल 20 साल पुरानी परंपरा तोड़ी है, बल्कि बिहार की राजनीति के पावर-स्ट्रक्चर को भी बदल दिया है। यह फैसला दिखाता है कि 2025 के बाद की राजनीति में BJP प्रमुख शक्ति है और नीतीश एक नए समीकरण के साथ राजनीतिक संतुलन साध रहे हैं। आने वाले समय में इसका असर कानून-व्यवस्था, गठबंधन की स्थिरता और राज्य की सत्ता की दिशा तीनों पर गहरा पड़ेगा।