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02-Nov-2025 03:11 PM
By First Bihar
Anant Singh: बिहार की राजनीति में मोकामा एक बेहद हॉट सीट के तौर पर हमेशा से रहा है और मोकामा की सियासत पर पिछले लगभग 30 वर्षों से अनंत सिंह का दबदबा रहा है। जेडीयू के विवादित नेता और बाहुबली माने जाने वाले अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्या मामले में शनिवार की देर रात पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के बाद बिहार की सियासी गलियों में चर्चा तेज हो गई है और आगामी विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मोकामा की राजनीति में नई हलचल मची हुई है।
दरअसल, अनंत सिंह चार भाइयों में सबसे छोटे हैं और उनके परिवार का राजनीतिक सफर उनके बड़े भाई दिलीप सिंह से शुरू हुआ था। दिलीप सिंह ने मोकामा से 1985, 1990 और 1995 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। 2000 के विधानसभा चुनाव में उनकी टक्कर बाहुबली नेता सूरजभान सिंह से हुई, जिसमें दिलीप सिंह को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने खुद मैदान में उतरकर मोकामा सीट पर जीत दर्ज की और तब से लेकर 2020 तक लगातार इस सीट पर उनका कब्जा रहा।
बता दें कि, अनंत सिंह का राजनीतिक करियर कई बार विवादों और आपराधिक मामलों से भी घिरा रहा है। 2022 में एक आपराधिक मामले में आरोपी ठहराए जाने के कारण उनकी विधायकी समाप्त हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने बागडोर संभाली और राजद के टिकट पर हुए मोकामा उपचुनाव में जीत हासिल की। नीलम देवी वर्तमान में मोकामा की विधायक हैं और उनके कार्यकाल ने इलाके में राजनीतिक संतुलन बनाए रखा है।
अनंत सिंह के जुड़वा बेटे, अंकित सिंह और अभिषेक सिंह, पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएट हैं और दिल्ली में रहते हैं। वहीं, अनंत सिंह के बेटे से जब चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया गया था, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल पापा मोकामा की जनता की सेवा कर रहे है। अभी मेरी उम्र नहीं है, लेकिन मौका मिलेगा तो मैं जरुर मोकामा की जनता की सेवा करुंगा।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में उनकी राजनीतिक विरासत को बेटे आगे बढ़ा सकते हैं। यह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मोकामा सीट को और अधिक रोचक और प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
मोकामा में बाहुबली राजनीति और परिवारवाद की छवि लंबे समय से रही है। अनंत सिंह के राजनीति और अपराध के मिश्रित इतिहास ने इलाके की राजनीति को अक्सर तनावपूर्ण और विवादास्पद बनाया है। इस बार चुनाव में उनके नाम का असर, उनकी गिरफ्तारी के बावजूद, जनता पर किस तरह पड़ेगा यह देखना महत्वपूर्ण होगा। विपक्ष और सहयोगी दल इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।
पटना पुलिस की जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बीच मोकामा के मतदाता राजनीतिक स्थिरता, विकास कार्य और स्थानीय मुद्दों पर भी ध्यान देंगे। चुनाव आयोग की निगरानी में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर भी चुनावी बहस होगी। इस स्थिति में मोकामा का चुनावी परिदृश्य काफी संवेदनशील और तनावपूर्ण बन गया है।