बिहार मौसम अपडेट: 34.3°C पहुंचा तापमान, 12 जिलों में बारिश की संभावना, अररिया और किशनगंज में येलो अलर्ट बिहार के बदलते-बदलते खुद बदल गये नीतीश कुमार, तेज प्रताप यादव का बड़ा बयान खुले में मीट बेचने वालों पर नगर निगम ने कसा शिकंजा, अब बिना लाइसेंस के नहीं खुलेंगी दुकानें पेशी के दौरान हाजीपुर कोर्ट से भागने की कोशिश, अपहरण के आरोपी को पुलिस ने दोबारा पकड़ा नीतीश को डिजिटल अरेस्ट किया गया: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी पर बोला हमला, कहा..अब चंद्रबाबू नायडू की बारी Bihar Crime News: सात सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा, 11 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला Bihar Crime News: सात सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा, 11 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने UPSC रिजल्ट को लेकर किया था झूठा दावा? संघ लोक सेवा आयोग का आया जवाब, जानिए.. ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने UPSC रिजल्ट को लेकर किया था झूठा दावा? संघ लोक सेवा आयोग का आया जवाब, जानिए.. रेलवे का बड़ा बदलाव: अब प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए QR टिकट जरूरी, जानिए कैसे बुक होगा नया टिकट
01-Aug-2025 07:41 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Election 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वोटर लिस्ट के प्रारूप जारी होने के बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में विशेष रूप से महागठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग से कई गंभीर सवाल पूछे और आपत्तियां दर्ज कराईं।
बैठक में महागठबंधन के नेताओं ने आयोग से पूछा कि ऐसे किन तथ्यों के आधार पर लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिनके बारे में यह कहा गया कि वे मृत हैं या अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि केवल "बगल के लोगों" से पूछकर नाम हटाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि 65 लाख नामों को सूची से हटाया गया है। जब आधार पूछा गया, तो आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया "कई तरीकों" और "दस्तावेज़ी प्रमाणों" पर आधारित है, लेकिन ठोस उत्तर नहीं दे सका, जिससे असंतोष गहरा गया।
राष्ट्रीय जनता दल ने चुनाव आयोग से 10 बिंदुओं पर जवाब मांगा है, जिनमें कुछ प्रमुख प्रश्नों में मतदाता सूची से हटाए गए ट्रेसलेस (गैर-स्थानीय) लोगों का आधार क्या है?, मृत मतदाताओं के नाम किस आधार पर हटाए गए? वोटर लिस्ट की प्रक्रिया में कितने लोगों तक यह सूची पहुंचाई गई?, विधानसभा वार कितने नाम हटाए गए? समेत अन्य सवाल शामिल हैं।
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि यदि इन सवालों का समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो यह चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करेगा। बैठक के बाद सभी दलों ने संकेत दिया है कि अगर चुनाव आयोग संतोषजनक उत्तर नहीं देता तो इस मुद्दे को अब बड़े आंदोलन का रूप भी दिया जा सकता है।