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Bihar News: सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर गिरेगी बड़ी गाज, नीतीश सरकार ने बनाया नया कानून

27-Nov-2024 08:26 PM

By First Bihar

PATNA: बिहार में अब सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों पर बड़ी गाज गिरेगी. सरकारी जमीन, मकान या दूसरी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वालों को ठीक करने के लिए नीतीश सरकार ने नया और कड़ा कानून बना दिया है. सरकार का ये नया कानून बुधवार को बिहार विधानसभा से पास हो या.


कब्जा करने वालों को जेल जाना पड़ेगा

बिहार सरकार ने सरकारी जमीन, मकान या फिर किसी और सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों के साथ साथ सरकारी जमीन को लीज पर लेकर समय पर भुगतान न करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए ये कानून बनाया है. नये कानून के तहत सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वालों को 6 महीने की जेल की सजा के साथ साथ 10 हजार रुपये के जुर्माने भरना पड़ेगा. 


दरअसल, अब तक बिहार में सरकारी संपत्ति का आवंटन कराने वालों या लीजधारी से आवंटन वापस लेने, किराया वसूली या बेदखली का कोई कड़ा कानून नहीं था. सरकार कह रही है कि इससे कारण बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन और संपत्ति पर अवैध कब्जा हो गया है. इसे कब्जा से मुक्त कराने के लिए नये कानून की जरूरत थी. लिहाजा, बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली, बेदखली) संशोधन विधेयक पारित कराया गया है. 


बिहार विधानसभा में भवन निर्माण मंत्री जयंत राज ने सरकारी जमीन, मकान और संपत्ति से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किया. मंत्री जयंत राज ने सदन में कहा कि अब तक सरकारी परिसरों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों से किराया वसूल करने, आवंटन निरस्त करने या फिर उस सरकारी संपत्ति से संबंधित व्यक्ति को बेदखल करने के लिए 1956 का कानून लागू था. 


68 साल पुराने कानून में मौजूदा समय के मुताबिक प्रावधान नहीं था. ऐसे में  लीज पर दी गयी सरकारी जमीन को खाली कराने, लीज किराये का फिर से निर्धारण करने और लीज की बकाया राशि वसूली में कठिनाई हो रही थी. मंत्री ने दावा किया कि बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली, बेदखली) संशोधन विधेयक 2024 में ढ़ेर सारे नये प्रावधान जोड़े गये हैं. नए कानून के लागू होने के बाद सरकारी संपत्ति पर कब्जे की आशंका कम हो जायेगी. 


मंत्री ने कहा कि जरूरत के मुताबिक सरकार निश्चित अवधि के लिए सरकारी परिसर को सरकारी, अर्द्ध सरकारी औऱ दूसरे वैधानिक संस्थाओं को आवंटित कर सकेगी. सदन में विपक्ष की गैर मौजूदगी में विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.