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15-Oct-2025 01:34 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीटों के बंटवारे के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बुधवार, 15 अक्टूबर को अपने पहले सूची जारी कर दी है। इस सूची में 57 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है, जिनमें चार महिला उम्मीदवार शामिल हैं।
गायघाट से कोमल सिंह को टिकट
इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा गायघाट सीट से प्रत्याशी बनाई गईं कोमल सिंह को लेकर हो रही है। कोमल, लोजपा (रामविलास) सांसद वीणा देवी की बेटी हैं और उनके पिता दिनेश सिंह जेडीयू से एमएलसी हैं। वर्ष 2020 में कोमल सिंह ने लोजपा के टिकट पर गायघाट से चुनाव लड़ा था और तीसरे स्थान पर रहीं थीं।
इस सीट से आरजेडी के निरंजन राय ने जीत दर्ज की थी, जबकि जेडीयू के महेश्वर प्रसाद यादव दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार सीट जेडीयू के हिस्से में आने के बाद कोमल सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि पहले कयास लगाए जा रहे थे कि वे लोजपा (रामविलास) से चुनाव लड़ेंगी।
समस्तीपुर से अश्वमेघ देवी को फिर मौका
समस्तीपुर सीट से जेडीयू ने अश्वमेघ देवी को दोबारा मैदान में उतारा है। 2020 में भी उन्होंने इसी सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें आरजेडी के अख्तरुल इस्लाम शाहीन से हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में शाहीन को 68,507 वोट मिले थे, जबकि अश्वमेघ देवी को 63,793 मत प्राप्त हुए थे। अश्वमेघ देवी जेडीयू से सांसद भी रह चुकी हैं।
विभूतिपुर से रवीना कुशवाहा मैदान में
विभूतिपुर सीट से जेडीयू ने रवीना कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। वे राम बालक सिंह की पत्नी हैं, जो पहले जेडीयू से विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में राम बालक सिंह ने इस सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। उस चुनाव में सीपीएम के अजय कुमार विजयी हुए थे। अब राम बालक सिंह की जगह उनकी पत्नी रवीना कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं जेडीयू ने मधेपुरा सीट से कविता साहा को अपना उम्मीदवार बनाया है।
मधेपुरा से कविता कुमारी साहा पर दांव
जेडीयू ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मधेपुरा सीट से पहली बार किसी गैर-यादव उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। पार्टी ने वर्तमान विधायक निखिल मंडल का टिकट काटते हुए उनकी जगह वैश्य समाज से आने वाली कविता कुमारी साहा को प्रत्याशी बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला पार्टी की "सामाजिक संतुलन" नीति के तहत लिया गया है। जेडीयू का मकसद इस कदम के जरिए पिछड़े वर्ग, दलितों और महिला मतदाताओं को साधना है।
बताया जा रहा है कि आजादी के बाद पहली बार किसी बड़ी पार्टी मधेपुरा से गैर-यादव उम्मीदवार को टिकट दी है। इससे पहले तक इस सीट पर यादव समाज का वर्चस्व रहा है और प्रमुख राजनीतिक दलों ने उन्हीं को उम्मीदवार बनाया था। जेडीयू के इस फैसले को राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो मधेपुरा की परंपरागत राजनीति को चुनौती दे सकता है।


