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17-Nov-2025 03:07 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Politics: 18वीं बिहार विधानसभा चुनाव में पारंपरिक राजनीतिक चेहरे ही नहीं, बल्कि कई प्रोफेशनल्स ने भी राजनीतिक मैदान में कदम रखा है। इनमें दो पूर्व आईपीएस अधिकारी, एक पूर्व आईआरएस अधिकारी, एक पूर्व बीडीओ, दो डॉक्टर, साथ ही कई अधिवक्ता, कलाकार, इंजीनियर और खिलाड़ी शामिल हैं। हालांकि, अपने-अपने क्षेत्र में सफल रहे कई प्रोफेशनल्स विधानसभा तक पहुंचने में असफल भी रहे।
पूर्व आईपीएस अधिकारियों में भोरे विधानसभा से सुनील कुमार को फिर सफलता मिली है। बिहार पुलिस में डीजी पद से वीआरएस लेकर राजनीति में आए सुनील कुमार वर्तमान बिहार सरकार में जदयू कोटे से मंत्री भी हैं। वहीं, असम-मेघालय कैडर के पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा पहली बार विधायक बने हैं। उन्होंने लोकसभा में निर्दलीय के रूप में मिली हार के बाद भाजपा के टिकट पर बक्सर से चुनाव जीतकर विधानसभा में जगह बनाई।
भारतीय राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे सुजीत कुमार दरभंगा के गौरा बौराम क्षेत्र से भाजपा के विधायक बने हैं। इसके अलावा, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) की नौकरी छोड़कर राजद से महिषी के चुनाव मैदान में उतरे गौतम कृष्णा को भी सफलता मिली। हालांकि, कुछ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को हार का सामना करना पड़ा।
कर्नाटक के पूर्व डीजीपी ब्रजकिशोर रवि कांग्रेस के टिकट पर रोसड़ा से हार गए। उन्हें 72,240 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। बिहार पुलिस के पूर्व आईजी शिवदीप लांडे ने जमालपुर और अररिया से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए क्रमशः 15,655 और 4,085 वोट पाए, लेकिन दोनों ही स्थानों पर वे सफल नहीं हो सके।
पूर्व आईएएस और कई जिलों में डीएम रहे ललन जी जमालपुर से जनसुराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े, उन्हें 3,863 वोट मिले और वे पांचवें स्थान पर रहे। वहीं, पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके मिश्रा दरभंगा से तीसरे स्थान पर रहे, उन्हें 11,758 वोट मिले।
छपरा से जनसुराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हिमाचल कैडर के पूर्व आईपीएस जयप्रकाश सिंह को 3,433 वोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे। नोखा से रिटायर्ड डीएसपी नसरूल्ला खां को 4,831 वोट मिले। इस तरह, 18वीं बिहार विधानसभा में कई प्रोफेशनल्स ने राजनीतिक मैदान में अपनी पकड़ बनाई, लेकिन हर किसी की चुनावी किस्मत कामयाब नहीं हो सकी।