Bihar sand mafia : अवैध बालू का खेल पासिंग गिरोह से ट्रकों की ‘सेफ एंट्री’, पुलिस-खनन अधिकारी सस्पेंड; जानिए क्या है पूरा मामला Patna Ultra Pods: बिना ड्राइवर चलेगी टैक्सी, 5 KM ट्रैक पर 59 पॉड्स दौड़ेंगे; इन 9 स्टेशन पर होगा स्टॉपेज इश्क ने ले ली जान: इंटर छात्र की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप Bihar Board Result 2026: बिहार में कब जारी होंगे मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट? आ गया संभावित डेट Bihar Board Result 2026: बिहार में कब जारी होंगे मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट? आ गया संभावित डेट Nitish Kumar : जाते -जाते बिहार सरकार का विजन क्लियर कर रहे नीतीश कुमार, बोले - 1 करोड़ लोगों को देंगे नौकरी, महिलाओं को देंगे 2-2 लाख रुपए भारत में ईरान युद्ध का असर: पूरे देश में LPG सप्लाई घटी, सरकार ने लागू किया ESMA; पहले इन लोगों को मिलेगा सिलेंडर भारत में ईरान युद्ध का असर: पूरे देश में LPG सप्लाई घटी, सरकार ने लागू किया ESMA; पहले इन लोगों को मिलेगा सिलेंडर Bihar Bhumi: बिहार में जमीन का सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी पूरी, कई शहरों में 80% से 400% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव Bihar Bhumi: बिहार में जमीन का सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी पूरी, कई शहरों में 80% से 400% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव
15-May-2020 09:22 AM
DESK : बैंको के साथ नौ हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामने के भगोड़े करोबारी विजय माल्या को जोर का झटका लगा है. प्रत्यर्पण मामले में इंग्लैंड के हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाने की याचिका खारिज कर दी है. जिसके बाद अब माल्या के सारे कानूनी रास्ते बंद हो चुके हैं, और अब 28 दिनों के अंदर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है. हालांकि कोरोना संकट को देखते हुए यह अभी थोड़ा मुश्किल लग रहा है.
इस याचिका के खारिज होने के बाद माना जा रहा है कि अब उसको 28 दिन के अंदर भारत को सौंपा जा सकता है. हालांकि यह फैसला ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल को करना होगा. इससे पहले माल्या को 20 अप्रैल के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए 14 दिन की मोहलत मिली थी.
अब माल्या के पास इंग्लैंड में कोई भी कानूनी रास्ता नहीं बचा है. हाई कोर्ट पहले ही प्रत्यर्पण के खिलाफ माल्या की याचिका खारिज कर चुका है. इंग्लैंड में सारे कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद 28 दिनों में माल्या का प्रत्यर्पण होना है, लेकिन मामला अगर यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जाता है तो प्रत्यर्पण लटक सकता है.