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Bihar sand mafia : अवैध बालू का खेल पासिंग गिरोह से ट्रकों की ‘सेफ एंट्री’, पुलिस-खनन अधिकारी के सस्पेंशन के बाद भी नहीं रूक रहा खेल

सारण में अवैध बालू कारोबार को लेकर कई बार सिस्टम पर सवाल उठे हैं। पासिंग गिरोह के जरिए ट्रक और ट्रैक्टर को सुरक्षित निकालने का खेल चलता रहा। मामले में पुलिसकर्मियों और खनन विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है।

Bihar sand mafia : अवैध बालू का खेल पासिंग गिरोह से ट्रकों की ‘सेफ एंट्री’, पुलिस-खनन अधिकारी के सस्पेंशन के बाद भी नहीं रूक रहा खेल
Tejpratap
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5 मिनट

Bihar sand mafia : बिहार के सारण जिले में अवैध बालू कारोबार एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब एक सप्ताह पहले रविवार की सुबह छपरा शहर के जगदम कॉलेज रेलवे ढाला के पास उस समय हड़कंप मच गया जब अवैध बालू से लदे ट्रैक्टर को पकड़ने पहुंची खनन विभाग की टीम और पुलिस पर बालू माफियाओं ने अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने सरकारी स्कॉर्पियो वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया और कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अवैध बालू कारोबार को लेकर बहस तेज हो गई है।


स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि बालू माफियाओं की इस दबंगई के पीछे कहीं न कहीं सिस्टम की कमजोरी या कुछ लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है। घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अवैध बालू खनन को रोकने में विफल रहने के आरोप में जिले के खनन पदाधिकारी लाल बिहारी प्रसाद और खान निरीक्षक अंजनी कुमार को निलंबित कर दिया। हालांकि इन सख्त कदमों के बावजूद इलाके में बालू माफियाओं और तथाकथित “पासिंग गिरोह” की गतिविधियां पूरी तरह से थमती नहीं दिख रही हैं।


दरअसल, सारण में अवैध बालू के परिवहन के लिए लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क सक्रिय रहा है, जिसे स्थानीय स्तर पर “पासिंग गिरोह” कहा जाता है। यह गिरोह अवैध बालू से लदे ट्रक और ट्रैक्टर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करता है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल रहते हैं, जो पैसे लेकर बिना जांच के वाहनों को आगे बढ़ने देते हैं। यही कारण है कि कई बार कार्रवाई होने के बावजूद यह कारोबार फिर से सक्रिय हो जाता है।


सारण में पहले भी पासिंग गिरोह का मामला सामने आ चुका है। उस समय डोरीगंज थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत 12 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। जांच में यह आरोप सामने आया था कि ये पुलिसकर्मी बालू माफियाओं के साथ मिलकर काम कर रहे थे और अवैध बालू से लदे ट्रक व ट्रैक्टर को बिना जांच के पास कराने के बदले उनसे मोटी रकम वसूलते थे। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था और विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की गई थी।


पुलिस के अलावा खनन विभाग भी इस विवाद से अछूता नहीं रहा है। बालू माफियाओं से मिलीभगत के आरोप में जिले के तत्कालीन खनन पदाधिकारी लाल बिहारी प्रसाद और खान निरीक्षक अंजनी कुमार को भी निलंबित किया गया था। उन पर आरोप था कि अवैध बालू के कारोबार को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और नियमों के उल्लंघन के बावजूद सख्ती नहीं बरती गई।


विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध बालू का कारोबार इसलिए फल-फूल रहा है क्योंकि इसमें कई स्तरों पर एक संगठित तंत्र काम करता है। घाट से लेकर सड़क तक और परिवहन से लेकर निगरानी तक यदि हर स्तर पर सख्त निगरानी नहीं होगी तो इस कारोबार को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो जाएगा। कई बार प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए स्थिति नियंत्रित हो जाती है, लेकिन बाद में फिर से अवैध खनन और परिवहन शुरू हो जाता है।


हालांकि प्रशासन की ओर से समय-समय पर छापेमारी और सख्त कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कड़ी निगरानी, पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेही तय करने के जरिए इस अवैध कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सकेगा या फिर यह खेल इसी तरह चलता रहेगा।


सारण में सामने आए हालिया घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अवैध बालू का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। जब तक सिस्टम के हर स्तर पर सख्ती और ईमानदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक इस अवैध कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना आसान नहीं होगा।

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