1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 10, 2026, 12:31:50 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar Bhumi: बिहार में जमीन के सौदों में पारदर्शिता लाने और राजस्व चोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी कर रही है। निबंधन विभाग ने इस संबंध में कैबिनेट नोट लगभग तैयार कर लिया है। प्रस्ताव के अनुसार, राज्य के कई शहरों में सर्किल रेट को बाजार मूल्य के करीब लाते हुए 80 प्रतिशत से लेकर 400 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है।
हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के कारण यह प्रस्ताव फिलहाल कैबिनेट में पेश नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अब इसे अप्रैल महीने में कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जाने की संभावना है। प्रस्ताव के अनुसार जिन इलाकों में बाजार रेट और सर्किल रेट के बीच कम अंतर है, वहां करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं जिन क्षेत्रों में दोनों के बीच बड़ा अंतर है, वहां दरों को बाजार मूल्य के करीब लाने के लिए 400 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है।
मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह प्रस्ताव पहले ही कैबिनेट के लिए तैयार था, लेकिन राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया। उम्मीद है कि नई सरकार के गठन के बाद होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य जमीन के सर्किल रेट को वास्तविक बाजार मूल्य के अधिकतम करीब लाना है। फिलहाल कई शहरों में जमीन के सौदे सर्किल रेट से 300 से 500 प्रतिशत अधिक कीमत पर हो रहे हैं, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हो रहा है। विभाग का अनुमान है कि प्रस्तावित दरें लागू होने पर राज्य को मिलने वाला वार्षिक राजस्व 7,600 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 16,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
निबंधन विभाग ने पटना, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया और सारण सहित सभी प्रमंडल मुख्यालयों और 24 से अधिक जिला मुख्यालयों में जमीन की वास्तविक कीमत का सर्वे कराया है। रिपोर्ट में पाया गया कि प्रमुख बाजारों, पॉश कॉलोनियों और मुख्य सड़कों के किनारे स्थित जमीन की वास्तविक कीमत और सर्किल रेट में काफी अंतर है।
उदाहरण के तौर पर पटना के बोरिंग कैनाल रोड जैसे इलाकों में सर्किल रेट फिलहाल करीब 30 लाख रुपये प्रति डिसिमल है, जबकि जमीन के वास्तविक सौदे इससे कई गुना अधिक कीमत पर हो रहे हैं। इसी तरह कई जिलों में भी जमीन की खरीद-बिक्री सरकारी दर से कई गुना अधिक कीमत पर पाई गई है।
सर्किल रेट में संशोधन की प्रक्रिया कई प्रशासनिक चरणों से गुजरती है। सबसे पहले जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में बैठक कर बाजार दर का आकलन किया जाता है। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति प्रस्ताव तैयार करती है और आम लोगों से आपत्तियां व सुझाव लिए जाते हैं। अंतिम प्रस्ताव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा जाता है, जहां समीक्षा के बाद कैबिनेट नोट तैयार कर सरकार की मंजूरी के लिए रखा जाता है।