बिहार में ट्रेन से शराब की तस्करी: सत्याग्रह एक्सप्रेस में कोच की छत से गिरने लगीं बोतलें, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल बिहार में ट्रेन से शराब की तस्करी: सत्याग्रह एक्सप्रेस में कोच की छत से गिरने लगीं बोतलें, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल नालंदा के शीतला माता मंदिर में गरजा बुलडोजर, भगदड़ में 8 महिलाओं की हुई थी मौत नालंदा के शीतला माता मंदिर में गरजा बुलडोजर, भगदड़ में 8 महिलाओं की हुई थी मौत महनार पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 1500 लीटर देसी शराब नष्ट, अवैध भट्ठियां भी ध्वस्त Goal International School में विद्यारंभ संस्कार का आयोजन, वैदिक रीति-रिवाज के साथ नई शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत बिहार में 60 से अधिक स्थानों पर बनेंगे फुटओवर ब्रिज, सड़क पार करने की समस्या होगी खत्म बिहार में 60 से अधिक स्थानों पर बनेंगे फुटओवर ब्रिज, सड़क पार करने की समस्या होगी खत्म गैस संकट- बिजली दर वृद्धि और महिला हिंसा पर संयुक्त बैठक की मांग, माले ने गठबंधन को लिखा पत्र, कहा..जनसमस्या को लेकर करें आंदोलन India gas news : PNG कनेक्शन के बाद पुराना LPG चूल्हा कैसे करें कन्वर्ट? जानें आसान और सुरक्षित तरीका
22-Oct-2019 07:51 AM
DELHI : स्वास्थ विभाग में अवैध तरीके से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों के वेतन और पेंशन भुगतान पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तरीके से विभाग में काम कर रहे हजारों कर्मियों को झटका दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सार्वजनिक पदों पर अवैध तरीके से नियुक्त लोगों को वेतन पेंशन और अन्य भत्ते नहीं दिए जा सकते। जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने स्वास्थ्य विभाग के उन कर्मियों की याचिका खारिज कर दी जो अपनी नियुक्ति की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे।
आपको बता दें कि साल 1980 से 1990 के बीच स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर ऐसी नियुक्तियां हुई थी। जिनके लिए ना तो पद को स्वीकृत किया गया और ना ही विज्ञापन सहित अन्य प्रक्रियाओं का पालन किया गया। बाद के दिनों में जब अवैध तरीके से नियुक्त कर्मियों के बारे में विभाग को जानकारी मिलेगी तो उन्हें सेवा से हटा दिया गया। सरकार के इस फैसले के खिलाफ यह कर्मी सुप्रीम कोर्ट गए थे जहां से उन्हें निराशा हाथ लगी।